बांग्लादेश में बिजली आपूर्ति को लेकर भारत के बड़े कारोबारी समूह Adani Group से जुड़ा समझौता एक बार फिर विवादों में है। ढाका सरकार की एक उच्चस्तरीय समीक्षा समिति ने अरबों डॉलर के इस बिजली सौदे में “गंभीर विसंगतियां” पाए जाने का दावा किया है। यह समझौता बांग्लादेश की कुल बिजली जरूरत का करीब 10 प्रतिशत पूरा करता है, ऐसे में जांच की खबर सामने आते ही राजनीतिक और आर्थिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
बांग्लादेश की समीक्षा समिति ने क्या उठाए सवाल
बांग्लादेश सरकार की ‘नेशनल रिव्यू कमेटी ऑन पावर परचेज एग्रीमेंट्स’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य की बिजली एजेंसी BPDB बिजली के लिए बाजार भाव से कहीं ज्यादा कीमत चुका रही है। समिति के अनुसार, भुगतान की जा रही दरें उचित मूल्य से लगभग 50 प्रतिशत तक अधिक हो सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये सिर्फ नीतिगत गलतियां नहीं, बल्कि “व्यवस्थित मिलीभगत” की ओर इशारा करती हैं, जिसमें व्यवसायिक हित, राजनीति और नौकरशाही के गठजोड़ की आशंका जताई गई है।
समिति का दावा है कि झारखंड स्थित गोड्डा कोयला आधारित पावर प्लांट से जुड़ी डील में प्रति यूनिट 4 से 5 सेंट तक की अतिरिक्त कीमत जोड़ी गई। यही कारण है कि इस पूरे समझौते की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस जांच को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के दौरान हुए बिजली सौदों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा बताया जा रहा है।
डील का आर्थिक असर और संभावित जोखिम
गोड्डा पावर प्रोजेक्ट करीब 2 अरब डॉलर की लागत से तैयार हुआ था और 2024 से बांग्लादेश को बिजली सप्लाई कर रहा है। 25 साल के इस अनुबंध के तहत हर साल लगभग 1 अरब डॉलर का भुगतान किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में ही BPDB को 4.13 अरब डॉलर का घाटा झेलना पड़ा है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता रद्द या दोबारा बातचीत के लिए खोला गया, तो बांग्लादेश में बिजली संकट और गहरा सकता है। भारत से आने वाली कुल 2200–2300 मेगावाट बिजली में इस परियोजना की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। ऐसे में किसी भी बड़े फैसले का असर सीधे आम उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ेगा।
Adani पावर की सफाई और आगे की राह
Adani पावर की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि कंपनी ने अभी पूरी रिपोर्ट नहीं देखी है, लेकिन वह प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली आपूर्ति कर रही है। कंपनी का यह भी कहना है कि भारी बकाया होने के बावजूद उसने सप्लाई बंद नहीं की और अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया।
वहीं, ढाका समिति ने सिफारिश की है कि जिन अनुबंधों में भ्रष्टाचार के स्पष्ट सबूत मिलें, उन्हें रद्द किया जाए या उनकी शर्तों पर फिर से बातचीत की जाए। इस मामले को बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल और क्षेत्रीय समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि जांच का नतीजा द्विपक्षीय संबंधों और ऊर्जा सहयोग की दिशा को किस तरह प्रभावित करता है।
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