Reality show की दुनिया से एक बार फिर विवाद सामने आया है, जहां Nikki Tamboli और Abhishek Malhan के बीच चल रही जुबानी जंग ने सोशल मीडिया पर नया मोड़ ले लिया है। बैटलग्राउंड 2 शो में दोनों के बीच टकराव अब केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर ‘नेगेटिव पेड PR’ के आरोपों तक पहुंच गया है। हाल ही में निक्की तंबोली ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए इशारों में बताया कि उनके खिलाफ पेड मीम्स और ट्रोलिंग के जरिए छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन फैंस इसे सीधे तौर पर उनके शो के प्रतिद्वंद्वी से जोड़कर देख रहे हैं।
Reality show में बढ़ता ‘पेड PR’ और सोशल मीडिया का दबाव
आज के समय में रियलिटी शोज केवल टैलेंट या पर्सनैलिटी का मंच नहीं रह गए हैं। सोशल मीडिया ने इन शोज की दिशा ही बदल दी है। अब किसी भी कंटेस्टेंट की लोकप्रियता सिर्फ शो के प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि ऑनलाइन नैरेटिव पर भी निर्भर करती है।‘पेड PR’ का मतलब होता है किसी के पक्ष में या खिलाफ जानबूझकर कंटेंट फैलाना। इसमें मीम पेज, ट्रोल अकाउंट और बॉट्स का इस्तेमाल किया जाता है। इससे किसी भी कलाकार की इमेज को बहुत तेजी से प्रभावित किया जा सकता है।
यह ट्रेंड नया नहीं है। पहले भी कई बड़े रियलिटी शो जैसे Bigg Boss और Splitsvilla के कंटेस्टेंट्स ने आरोप लगाए हैं कि उनके खिलाफ ट्रोल आर्मी का इस्तेमाल हुआ। कई मामलों में यह भी सामने आया कि एजेंसियां पैसे लेकर सोशल मीडिया पर नैरेटिव सेट करती हैं। यह ट्रेंड दर्शाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि इमेज बिल्डिंग और ब्रेकिंग का बड़ा जरिया बन चुका है।
मानसिक असर और भविष्य के लिए बड़ी चुनौती
सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और नेगेटिव कैंपेन का असर केवल इमेज तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा असर कलाकारों की मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। कई सेलिब्रिटीज ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि उन्हें ट्रोलिंग के कारण एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।खासकर महिला कलाकारों के लिए यह स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है। उनके खिलाफ चलने वाले मीम्स और नेगेटिव कंटेंट कई बार व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच जाते हैं। इससे न सिर्फ उनकी पब्लिक इमेज प्रभावित होती है, बल्कि उनकी सुरक्षा और मानसिक संतुलन भी खतरे में पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ट्रेंड को नियंत्रित करने के लिए सख्त डिजिटल नियमों और प्लेटफॉर्म मॉडरेशन की जरूरत है। साथ ही दर्शकों को भी यह समझना होगा कि हर वायरल कंटेंट सच नहीं होता।आने वाले समय में रियलिटी शो की सफलता केवल TRP से नहीं, बल्कि डिजिटल विश्वसनीयता से भी तय होगी। ऐसे में पेड PR और ट्रोलिंग जैसे ट्रेंड पर लगाम लगाना जरूरी हो जाता है, ताकि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री स्वस्थ और निष्पक्ष बनी रहे।
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