फिल्म और राजनीति के बीच बढ़ती बहस के बीच यूट्यूबर Dhruv Rathee ने हाल ही में फिल्म Dhurandhar: The Revenge पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने नए वीडियो में उन्होंने फिल्म की कहानी, तथ्यों की प्रस्तुति और इसके सामाजिक प्रभाव पर तीखी टिप्पणी की है। उनका कहना है कि फिल्म वास्तविक घटनाओं से ज्यादा “व्हाट्सएप फॉरवर्ड्स” से प्रेरित लगती है, जिससे एक नई बहस छिड़ गई है।

Dhurandhar 2 फिल्म की कहानी और तथ्यों पर उठे सवाल

यूट्यूबर Dhruv Rathee ने अपने वीडियो में दावा किया कि फिल्म की कहानी वास्तविक घटनाओं को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। उन्होंने खास तौर पर फिल्म में दिखाए गए कुछ राजनीतिक संदर्भों, जैसे नोटबंदी, पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, फिल्म इन घटनाओं को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत करती है, जबकि असल घटनाएं कहीं ज्यादा जटिल थीं।

उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म के डिस्क्लेमर में “inspired by real events” लिखा होना एक तरह का “legal loophole” बन गया है, जिसके जरिए निर्माता अपनी बात को सच जैसा दिखा सकते हैं।Rathee ने अपने तर्कों को RBI रिपोर्ट्स और रिसर्च के हवाले से समझाने की कोशिश की और कहा कि फिल्मों को दर्शकों के सामने संतुलित दृष्टिकोण रखना चाहिए।

सेंसरशिप, अभिव्यक्ति और समाज पर असर

इस मुद्दे ने केवल फिल्म की कहानी तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अब यह बहस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सेंसरशिप तक पहुंच गई है। Dhruv Rathee ने सवाल उठाया कि क्या ऐसी फिल्मों को बिना सख्त जांच के रिलीज किया जाना चाहिए, खासकर जब उनमें राजनीतिक संदेश शामिल हों।उन्होंने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से भी इस पर स्पष्टता मांगी कि क्या फिल्मों के जरिए किसी राजनीतिक नैरेटिव को बढ़ावा देना सही है।

हालांकि, फिल्म के समर्थकों का मानना है कि सिनेमा एक क्रिएटिव माध्यम है और इसमें कल्पना का इस्तेमाल स्वाभाविक है। वहीं कुछ लोग इसे “creative freedom” का हिस्सा बता रहे हैं।यह पहली बार नहीं है जब किसी फिल्म को लेकर इस तरह की बहस सामने आई हो। भारतीय सिनेमा में पहले भी कई फिल्मों पर तथ्य और फिक्शन के संतुलन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

दर्शकों के बीच बंटी राय और आगे का असर

फिल्म को लेकर दर्शकों की राय भी बंटी हुई नजर आ रही है। एक तरफ जहां कुछ लोग फिल्म के एक्शन, कहानी और स्केल की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक वर्ग इसे भ्रामक बताकर आलोचना कर रहा है।सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है और इससे साफ है कि फिल्म ने लोगों के बीच चर्चा जरूर पैदा की है।ऐसे मामलों में यह जरूरी हो जाता है कि दर्शक भी कंटेंट को समझदारी से देखें और हर जानकारी को आंख मूंदकर सच न मानें।

कुल मिलाकर, Dhurandhar को लेकर उठी यह बहस केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिनेमा की जिम्मेदारी, दर्शकों की समझ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे बड़े मुद्दों को भी सामने लाती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस तरह के विवादों का फिल्म इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ता है।