ICICI: भारत की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार में नई चर्चा शुरू हो गई है। बैंकिंग सेक्टर की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम दिख रही है। कोर महंगाई के शांत रहने और वैश्विक तेल कीमतों के नियंत्रित असर ने केंद्रीय बैंक के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत फिलहाल कम कर दी है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर महंगाई इसी दायरे में रहती है तो लोन EMI और निवेश माहौल में स्थिरता बनी रह सकती है।

RBI: कोर महंगाई शांत, इसलिए दरें स्थिर रहने के संकेत

हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार CPI inflation अपेक्षा से नीचे बना हुआ है। यही कारण है कि Monetary Policy Committee के सामने दर बढ़ाने का दबाव नहीं बन रहा। विश्लेषण बताता है कि पिछले कुछ महीनों में खाद्य महंगाई में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन कोर महंगाई में बड़ी तेजी नहीं आई। इसी वजह से उधारी महंगी करने की जरूरत कम दिख रही है।यहां यह भी समझना जरूरी है कि जब महंगाई तेजी से बढ़ती है तभी आम तौर पर रेपो रेट बढ़ाया जाता है। लेकिन फिलहाल स्थिति अलग है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कीमतों में अचानक उछाल नहीं आता तो RBI, ICICI Bank से जुड़े अनुमान के अनुसार 2026-27 में भी पॉलिसी रेट लंबे समय तक स्थिर रह सकते हैं।दरें स्थिर रहने का असर आम लोगों पर सीधा पड़ता है। होम लोन, ऑटो लोन और बिजनेस लोन की EMI में अचानक बढ़ोतरी की आशंका कम हो जाती है। निवेशकों के लिए भी यह संकेत सकारात्मक माना जाता है क्योंकि स्थिर ब्याज दरें इक्विटी मार्केट को सपोर्ट करती हैं।इसके अलावा financial stability बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक अक्सर धीरे-धीरे फैसले लेता है ताकि बाजार में झटका न लगे।

तेल कीमतों और ग्लोबल फैक्टर्स का असर

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के महीनों में crude oil price बढ़ने के बावजूद महंगाई पर बहुत बड़ा दबाव नहीं पड़ा। आम तौर पर तेल महंगा होने पर ट्रांसपोर्ट और प्रोडक्शन लागत बढ़ती है, जिससे inflation outlook खराब होता है। लेकिन इस बार असर सीमित रहा।विशेषज्ञों के मुताबिक इसका कारण बेहतर सप्लाई मैनेजमेंट और घरेलू मांग का संतुलन है। इसी आधार पर RBI, ICICI Bank की स्टडी बताती है कि Monetary Policy Rate फिलहाल स्थिर रह सकता है।

यह स्थिति निवेश और विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। दरें स्थिर रहने से कंपनियां विस्तार योजनाएं जारी रख सकती हैं और consumers spending भी बनी रहती है।लंबी अवधि में यह भी देखा गया है कि जब केंद्रीय बैंक लगातार दरें नहीं बढ़ाता, तब अर्थव्यवस्था में growth momentum मजबूत होता है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी भी देते हैं कि अगर वैश्विक बाजार में अचानक झटका आता है या खाद्य महंगाई बढ़ती है तो नीति बदल सकती है।यानी फिलहाल संकेत स्थिरता के हैं, लेकिन अंतिम फैसला आने वाले inflation data पर ही निर्भर करेगा।

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