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Bihar में 13 हजार अस्पतालों में दवा संकट, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पर सवाल

Bihar में 13 हजार सरकारी अस्पतालों में पांच महीने से आयुष दवाएं नहीं हैं। निशांत कुमार के स्वास्थ्य विभाग पर अब सवाल उठने लगे हैं।
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Bihar के सरकारी अस्पतालों में आयुष दवाओं की कमी ने मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है। राज्य के जिला अस्पतालों से लेकर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पिछले पांच महीनों से आयुर्वेद, होमियोपैथी और यूनानी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण करीब 13 हजार अस्पतालों में दवाओं की खरीद अब तक शुरू नहीं हो सकी है।

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Bihar: पांच महीने से अटकी दवा खरीद, मरीज परेशान

जानकारी के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल ही फैसला लिया था कि आयुष दवाओं की खरीद बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के जरिए की जाएगी। दिसंबर 2025 में इस संबंध में पत्र भी भेजा गया था, लेकिन अब तक निविदा जारी नहीं हो सकी है। इसी कारण सरकारी अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो गई है। राज्य सरकार मुफ्त इलाज का दावा करती है, लेकिन अस्पतालों की स्थिति अलग तस्वीर दिखा रही है।

कई अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें जरूरी आयुष दवाएं नहीं मिल रही हैं। कुछ मरीजों को बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे गरीब और ग्रामीण परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बिहार के कई जिलों में लोग सरकारी अस्पतालों से खाली हाथ लौट रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में आयुष दवाओं पर भरोसा करने वाले मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। अस्पतालों में दवाएं नहीं होने से मरीजों में नाराजगी भी बढ़ रही है।

डॉक्टरों की तैनाती हुई, लेकिन दवाएं नहीं पहुंचीं

राज्य में पिछले साल 2901 आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति की गई थी। फिलहाल 4365 आयुष डॉक्टर अलग-अलग अस्पतालों में तैनात हैं। इन डॉक्टरों के वेतन पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद अस्पतालों में आयुष दवाओं की कमी बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक, कई आयुष डॉक्टर मजबूरी में अंग्रेजी दवाएं लिख रहे हैं। कैमूर के एक चिकित्सक ने बताया कि मरीज आयुष दवाओं पर भरोसा करते हैं, लेकिन अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने से परेशानी बढ़ रही है।

कुछ मरीज बाजार से दवा खरीदने में सक्षम नहीं हैं और इसी वजह से अस्पतालों में विवाद की स्थिति भी बन रही है। दवा खरीद में देरी की वजह आवश्यक दवाओं की सूची तैयार होने में देर और निविदा प्रक्रिया अटकना बताया जा रहा है। विभागीय स्तर पर फैसला होने के बावजूद जमीन पर इसका असर नहीं दिख रहा है। अगर आप सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए जा रहे हैं, तो पहले वहां दवाओं की उपलब्धता की जानकारी लेना जरूरी हो सकता है। इससे आपको अनावश्यक परेशानी से बचने में मदद मिलेगी।

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लेखक के बारे में By Srota Swati Tripathy

जगन्नाथ की भूमि और नीले समंदर के किनारों से निकलकर झीलों के शहर भोपाल की एमसीयू यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री कर रहे हैं। सीखने और समझने का दौर अभी भी जारी है। अब 'समस्तीपुर न्यूज़' के कंटेंट राइटर और अपने लेख के लिए जाने जाते हैं|

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