जम्मू-कश्मीर में प्रवासी मजदूरों पर आतंकी हमले का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में बिहार के प्रवासी मजदूरों पर हुए हमले के बाद, एक बार फिर दो श्रमिकों को आतंकी हमले में गोली मारी गई। ताजा घटना मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के मजाहामा इलाके में शुक्रवार शाम को हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश के दो मजदूर संजय और उस्मान घायल हो गए। दोनों जल जीवन परियोजना में काम कर रहे थे और अब अस्पताल में उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर कर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी।

आतंकी हमलों में वृद्धि: प्रवासी मजदूरों पर बढ़ते हमले

पिछले कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाने की आतंकी घटनाओं में तेज़ी आई है। 18 अक्टूबर को, शोपियां में बिहार के मक्का विक्रेता अशोक चौहान की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं 24 अक्टूबर को, प्रसिद्ध स्की-रिसॉर्ट गुलमर्ग के पास बोटा पाथरी में घात लगाकर हुए एक हमले में तीन सैनिक और दो सेना के कुली मारे गए थे। आतंकी गतिविधियों का यह बढ़ता सिलसिला प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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पिछले हमलों का सिलसिला और सुरक्षा चुनौती

पिछले महीने ही गंदेरबल जिले के गुंड इलाके में एक निर्माणाधीन सुरंग के पास हुए हमले में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक स्थानीय डॉक्टर और कई प्रवासी मजदूर भी शामिल थे। इन घटनाओं में न केवल स्थानीय बल्कि गैर-स्थानीय मजदूर भी निशाना बनाए जा रहे हैं, जिससे प्रवासी श्रमिकों में दहशत बढ़ रही है। इन हमलों में आतंकियों की पहचान और उनका मकसद अभी भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।

प्रवासी मजदूरों और सेना पर हमले: सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद से घाटी में प्रवासी मजदूरों और सुरक्षा बलों पर आतंकी हमलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। यह स्थिति सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है। घाटी में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कई बार सवाल उठे हैं, लेकिन बढ़ते हमलों ने प्रवासी श्रमिकों के जीवन को खतरे में डाल दिया है।

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