देश का अगला Union Budget 2026 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सुबह 11 बजे लोकसभा में बजट भाषण देंगी। बजट की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। इस बार आम लोगों की नजर टैक्स राहत, महंगाई, रोजगार और विकास योजनाओं पर है। साथ ही, बजट से जुड़ा एक दिलचस्प इतिहास भी चर्चा में है—भारत में अब तक सिर्फ दो महिला नेताओं ने बजट पेश किया है, जिनमें इंदिरा गांधी और निर्मला सीतारमण शामिल हैं।
आम लोगों की उम्मीदें और Union Budget highlights पर नजर
हर साल देश का बजट सिर्फ सरकारी आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह आम परिवारों की जेब और भविष्य की योजनाओं से भी जुड़ा होता है। इस बार भी लोगों की उम्मीदें कई सेक्टरों से जुड़ी हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में बड़े ऐलान की संभावना जताई जा रही है।
सबसे ज्यादा चर्चा Budget highlights को लेकर रहती है, क्योंकि यहीं से पता चलता है कि सरकार किस दिशा में फोकस कर रही है। आम जनता चाहती है कि महंगाई को कंट्रोल करने के लिए ठोस कदम उठें और नौकरी-पेशा वर्ग को राहत मिले। खासकर टैक्स सिस्टम में बदलाव या छूट की मांग लगातार उठ रही है।
इसके साथ ही सरकार के खर्च और विकास की योजना भी महत्वपूर्ण होती है। जब सरकार ज्यादा निवेश करती है, तो उससे रोड, रेलवे, डिजिटल सेवाएं और अन्य सुविधाएं बेहतर होती हैं। इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पड़ता है।
इस बार बजट को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या यह बजट युवा, किसान और मिडिल क्लास के लिए राहत लेकर आएगा या नहीं। बजट पेश होने के बाद ही यह साफ होगा कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या रहीं और किन सेक्टरों को ज्यादा सपोर्ट मिला।
टैक्स सिस्टम से लेकर GST update तक: क्या बदल सकता है इस बार?
हर बजट में टैक्स से जुड़े फैसले सबसे ज्यादा ध्यान खींचते हैं। खासकर नौकरीपेशा लोगों की नजर Income tax slab में बदलाव पर रहती है। कई लोग उम्मीद कर रहे हैं कि टैक्स स्लैब को आसान बनाया जाए, ताकि मासिक सैलरी पर दबाव कम हो।
वहीं सरकार के सामने New tax regime और Old tax regime को लेकर भी बैलेंस बनाना चुनौती होती है। नई व्यवस्था में कम दरें हैं, लेकिन छूट कम मिलती है। पुरानी व्यवस्था में छूट ज्यादा हैं, लेकिन टैक्स रेट अलग हैं। इस वजह से लोग चाहते हैं कि सिस्टम और सरल हो, ताकि निर्णय लेना आसान बने।
इसके अलावा Standard deduction को बढ़ाने की मांग भी अक्सर बजट से पहले उठती है। यह कटौती बढ़ती है तो नौकरीपेशा वर्ग को सीधी राहत मिलती है।
टैक्स के साथ-साथ कारोबारियों और आम ग्राहकों की नजर GST update पर भी रहती है। अगर जीएसटी में किसी तरह की राहत या बदलाव होता है, तो उसका असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर दिख सकता है।कुल मिलाकर, इस बार बजट से उम्मीद है कि टैक्स और खर्च दोनों में संतुलन बनाकर सरकार आम जनता और बिजनेस सेक्टर को भरोसा देगी।
महिला नेताओं का बजट इतिहास: इंदिरा गांधी से निर्मला सीतारमण तक
भारत के बजट इतिहास में महिला नेतृत्व की भूमिका खास रही है। अब तक केवल दो महिला नेताओं ने संसद में बजट पेश किया है। पहली थीं इंदिरा गांधी, जिन्होंने 28 फरवरी 1970 को वित्त वर्ष 1970-71 का बजट पेश किया था। उस समय वह प्रधानमंत्री के साथ-साथ वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रही थीं। उनके बजट भाषण में विकास और गरीबों के कल्याण के बीच संतुलन की बात प्रमुख थी।
आज के समय में वही जिम्मेदारी निर्मला सीतारमण निभा रही हैं। उन्होंने बजट को एक नए दौर में पेश किया, जहां डिजिटल अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास योजनाओं पर लगातार जोर देखा गया।
बजट सिर्फ खर्च का प्लान नहीं होता, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा तय करता है। सरकार का लक्ष्य होता है कि Fiscal deficit को कंट्रोल में रखते हुए विकास को आगे बढ़ाया जाए। इसी वजह से इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश पर Capex boost जैसी रणनीतियां अहम मानी जाती हैं।
आम जनता के लिए सबसे बड़ी बात यही होती है कि क्या इस बजट से Middle class relief मिलेगी या नहीं। अब सबकी नजर 1 फरवरी पर है, जब बजट की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
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