Samastipur Special: Sonam Wangchuk लद्दाख आंदोलन के नायक ‘सोनम वांगचुक’ NSA के तहत गिरफ्तार

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Samastipur Special: प्रसिद्ध शिक्षाविद्, इनोवेटर और पर्यावरण कार्यकर्ता Sonam Wangchuk को लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें लेह से राजस्थान के जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित किया गया है। सोनम वांगचुक, जिन्होंने कई वर्षों से लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व किया है, उनकी गिरफ्तारी एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन गई है।

कौन हैं Sonam Wangchuk और उन्होंने क्या किया?

सोनम वांगचुक, लद्दाख के एक प्रसिद्ध शिक्षाविद और इनोवेटर हैं, जिन्होंने Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh (SECMOL) और Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh (HIAL) की स्थापना की। उन्होंने शिक्षा के स्थानीयकरण, पर्यावरण संरक्षण, और सतत विकास के लिए अनोखे मॉडल प्रस्तुत किए। बॉलीवुड फिल्म “थ्री इडियट्स” में आमिर खान का किरदार “फुंसुक वांगडू” उन्हीं से प्रेरित था।

उन्होंने लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के लिए वर्षों तक काम किया है। 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद, वह इस क्षेत्र को संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के प्रमुख चेहरे बन गए।

लद्दाख में उनकी प्रमुख मांगें थीं:

  • राज्य का दर्जा दिया जाए।
  • संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए, जो स्थानीय आबादी और पर्यावरण को विशेष सुरक्षा प्रदान करती है।

गिरफ्तारी से पहले, वह अपनी मांगों को लेकर लंबे उपवास पर थे। उनके नेतृत्व में आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था।

गिरफ्तारी और उन पर लगे आरोप

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था, यह गिरफ्तारी 24 सितंबर को लेह में हुए हिंसक झड़पों के दो दिन बाद हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे।

मुख्य आरोप:

हिंसा भड़काना: पुलिस और प्रशासन का आरोप है कि वांगचुक ने अपने भड़काऊ भाषणों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाया, जिसके कारण झड़पें हुईं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा। गृह मंत्रालय ने भी भीड़ हिंसा के लिए उनके ‘भड़काऊ बयानों’ को जिम्मेदार बताया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA): उन्हें कठोर NSA के तहत हिरासत में लिया गया है, जिसके तहत बिना मुकदमे के एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। यह आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डालने से संबंधित हैं।

वित्तीय अनियमितताएं: वांगचुक के एनजीओ SECMOL पर अवैध विदेशी फंडिंग लेने, वित्तीय गड़बड़ी और फर्जी घोषणाएँ करने के भी गंभीर आरोप हैं। उनके NGO का FCRA लाइसेंस (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) रद्द कर दिया गया है और सीबीआई जांच लंबित है। प्रशासन ने उन पर आत्मदाह की सलाह देने का भी आरोप लगाया है।

पाकिस्तान से कथित संबंध: लद्दाख पुलिस ने कथित तौर पर वांगचुक के पाकिस्तान स्थित एक PIO (इंटेलिजेंस ऑफिसर) से लिंक होने का भी आरोप लगाया है।

NSA क्या है और इसका इस्तेमाल कैसे हुआ?

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) एक ऐसा कानून है जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे के एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है यदि वह सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो। पहले इस कानून का उपयोग कट्टर उपदेशकों, अपराधियों और अलगाववादी नेताओं के खिलाफ किया गया था। इस बार लद्दाख हिंसा को NSA लगाने का आधार बताया गया है, लेकिन कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे अत्यधिक कठोर और असंवैधानिक कदम कहा है।

घटना की तथ्य जाँच (Fact Check) और विवाद

इस घटना के कई पहलू हैं, जिन पर विवाद और जाँच जारी है:

हिंसा का कारण: प्रशासन ने हिंसा के लिए वांगचुक के भड़काऊ भाषणों को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि प्रदर्शनकारियों के समर्थकों का कहना है कि हिंसा पुलिस की कथित गोलीबारी और आंदोलन को दबाने के प्रयास के कारण भड़की।

NSA का इस्तेमाल: वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि अंगमो, ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर NSA के तहत गिरफ्तारी को अवैध और असंवैधानिक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के आधार उन्हें नहीं बताए गए, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

राजनीतिक संलिप्तता और मीडिया TRP: यह मामला स्पष्ट रूप से राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।

राजनीतिक संलिप्तता: लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग केंद्र सरकार के वादे और नीतियों से जुड़ी है। वांगचुक की गिरफ्तारी को उनके समर्थकों ने सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाज़ को दबाने के लिए एक राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। उनकी पत्नी ने याचिका में आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी राजनीतिक कारणों से हुई है और इसका उद्देश्य शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक और पर्यावरणीय एक्टिविज्म को डराना है।

मीडिया TRP: सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति को देखते हुए, उनकी गिरफ्तारी की खबर को मीडिया में व्यापक कवरेज मिला है, जिससे टीआरपी बढ़ने की संभावना है। आरोपों की गंभीरता और ‘थ्री इडियट्स’ से उनका जुड़ाव इस खबर को जनता के बीच अत्यधिक रुचि का विषय बनाता है। सोशल मीडिया पर #StandWithSonam और #JusticeForLadakh जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। यूट्यूब, इंस्टाग्राम और X (पूर्व ट्विटर) पर उनके भाषणों के वीडियो वायरल हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का रुख: उनकी पत्नी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होनी है।

सोनम वांगचुक की NSA के तहत गिरफ्तारी लद्दाख के राज्यत्व आंदोलन का एक गंभीर मोड़ है। उन पर हिंसा भड़काने, वित्तीय अनियमितताओं और देश विरोधी गतिविधियों के आरोप हैं, जबकि उनके समर्थक इसे राजनीतिक विरोध की आवाज़ को कुचलने का प्रयास बता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में चुनौती और न्यायिक प्रक्रिया इस विवादास्पद मामले की अंतिम दिशा तय करेगी, जिसने पर्यावरण एक्टिविज्म और लोकतंत्र पर बहस छेड़ दी है।

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, यह लोकतांत्रिक अधिकारों, पर्यावरणीय आंदोलन और संवैधानिक आज़ादी का प्रतीक बन गई है। सुप्रीम कोर्ट का आने वाला फैसला न केवल लद्दाख, बल्कि पूरे देश में लोकतांत्रिक असहमति की दिशा तय करेगा।

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सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी: लोकतंत्र के लिए शुभ या अशुभ?

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Srota Swati Tripathy

नमस्ते! मैं हूँ श्रोता स्वाति त्रिपाठी, कंटेंट राइटर जो खबरों को आसान और रोचक अंदाज़ में पेश करती हूँ। उम्मीद है आपको मेरा लिखा कंटेंट पसंद आएगा और पढ़ते-पढ़ते कुछ नया जानने को मिलेगा!

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