Rajpal Yadav को नहीं मिली राहत! हाईकोर्ट में जमानत पर टला फैसला, अब 16 फरवरी पर सबकी नजर

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12 फरवरी 2026 को दिल्ली से आई बड़ी अपडेट में फिल्म अभिनेता Rajpal Yadav को फिलहाल राहत नहीं मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी सजा निलंबित कर जमानत पर रिहाई की याचिका पर तुरंत फैसला देने के बजाय संबंधित कंपनी को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 फरवरी को तय की गई है। अभिनेता ने शाहजहांपुर में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने पहले पक्षकारों से जवाब तलब करना जरूरी समझा। 5 फरवरी से वे तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।

Rajpal Yadav: दिल्ली हाईकोर्ट में क्या हुआ?

दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में सजा निलंबन (sentence suspension) और अस्थायी जमानत की मांग की गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान मुरली प्रोजेक्ट कंपनी को नोटिस जारी करते हुए उनका पक्ष जानना जरूरी माना। कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत पहले शिकायतकर्ता या संबंधित पक्ष की दलील सुनती है, उसके बाद ही राहत पर फैसला करती है।

यह मामला चेक बाउंस केस से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें पहले निचली अदालत से सजा सुनाई जा चुकी है। अब हाईकोर्ट में अपील लंबित है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में अदालत व्यक्तिगत परिस्थितियों—जैसे पारिवारिक कार्यक्रम—को देखते हुए अंतरिम जमानत दे सकती है, लेकिन यह पूरी तरह न्यायिक विवेक पर निर्भर करता है।

तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत और आगे की कानूनी राह

Rajpal Yadav 5 फरवरी से तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। न्यायिक हिरासत का अर्थ है कि आरोपी को अदालत के आदेश पर जेल प्रशासन की निगरानी में रखा जाता है। यह पुलिस रिमांड से अलग होता है।कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, यदि हाईकोर्ट अंतरिम राहत नहीं देता, तो अगला विकल्प नियमित जमानत या सजा के खिलाफ विस्तृत अपील की सुनवाई होती है। अदालत यह भी देखती है कि आरोपी का आचरण कैसा रहा है और क्या वे फरार होने या सबूत प्रभावित करने की स्थिति में हैं।

फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहे इस कलाकार Rajpal Yadav का मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे कई वर्षों से कॉमेडी फिल्मों का लोकप्रिय चेहरा रहे हैं। हालांकि, अदालत का फैसला केवल तथ्यों और कानूनी आधार पर होता है, न कि लोकप्रियता पर।यह प्रकरण एक बार फिर यह याद दिलाता है कि वित्तीय विवादों से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। आम नागरिकों के लिए भी यह केस एक उदाहरण है कि चेक बाउंस या वित्तीय लेनदेन से जुड़े विवादों को समय रहते सुलझाना कितना जरूरी है।

16 फरवरी की सुनवाई अब इस मामले का अगला अहम पड़ाव होगी। अदालत का फैसला आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि उन्हें अंतरिम राहत मिलती है या नहीं। फिलहाल, सभी की नजरें हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं।

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Srota Swati Tripathy

जगन्नाथ की भूमि और नीले समंदर के किनारों से निकलकर झीलों के शहर भोपाल की एमसीयू यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री कर रहे हैं। सीखने और समझने का दौर अभी भी जारी है। अब 'समस्तीपुर न्यूज़' के कंटेंट राइटर और अपने लेख के लिए जाने जाते हैं|

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