Odisha,नयागढ़ जिले के एक सरकारी हाई स्कूल में दो छात्रों के बेहोश होने की घटना ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार दोनों छात्र सातवीं कक्षा के हैं और स्कूल पहुंचने के कुछ देर बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। स्कूल प्रशासन का दावा है कि बच्चे नशे की हालत में आए थे, जबकि अभिभावक इस बात से इनकार कर रहे हैं और पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं। घटना के बाद शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट तलब कर ली है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
Odisha स्कूल परिसर में क्या हुआ और क्यों बढ़ा विवाद
स्कूल प्रशासन के मुताबिक, दोनों छात्र सुबह कक्षा में पहुंचे लेकिन थोड़ी देर बाद बेहोश होकर गिर पड़े। शिक्षकों ने तुरंत उन्हें प्राथमिक उपचार दिया और अभिभावकों को बुलाया। प्रिंसिपल ने कहा कि छात्रों ने परिसर में आने से पहले शराब पी थी। हालांकि माता-पिता ने आरोपों को खारिज कर दिया और दावा किया कि बच्चों ने स्कूल के अंदर किसी के साथ कुछ संदिग्ध पदार्थ लिया हो सकता है।
इस घटना के बाद Child Safety, School Discipline और Student Health जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस उम्र में ऐसे मामलों के पीछे कई कारण हो सकते हैं — गलत संगत, ऑनलाइन कंटेंट का प्रभाव, या निगरानी की कमी।इसी वजह से parents concern और school safety policy पर सवाल उठ रहे हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि स्कूलों को सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि व्यवहारिक शिक्षा और नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम भी चलाने चाहिए। कई राज्यों में अब “स्कूल काउंसलिंग” को अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है ताकि बच्चों में जोखिम भरे व्यवहार को पहले ही रोका जा सके।
जांच, जिम्मेदारी और आगे क्या होगा
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि साफ हो सके कि उन्होंने वास्तव में शराब पी थी या कोई अन्य पदार्थ लिया था। अधिकारियों ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार किशोरावस्था में substance awareness बेहद जरूरी है। कई बार बच्चे जिज्ञासा में गलत कदम उठा लेते हैं। इसलिए परिवार और स्कूल दोनों की जिम्मेदारी तय मानी जाती है।
घटना के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों को सलाह दी है कि बैग चेकिंग, निगरानी और अभिभावक मीटिंग नियमित कराई जाए। साथ ही बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य और नशे के नुकसान के बारे में समझाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने की योजना भी बनाई जा रही है। Odisha में पहले भी इस तरह की छोटी-छोटी घटनाओं के बाद बड़े सुधार हुए हैं, इसलिए उम्मीद है कि इस मामले के बाद भी स्कूल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को डराने के बजाय समझाने की जरूरत है, तभी ऐसे मामले भविष्य में रोके जा सकते हैं।
यह घटना सिर्फ एक स्कूल की लापरवाही या बच्चों की गलती नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। समय रहते जागरूकता, संवाद और निगरानी बढ़ाई जाए तो ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं।
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