राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Lalu Prasad Yadav को लैंड फॉर जॉब मामले में Supreme Court of India से राहत नहीं मिली है। अदालत ने सीबीआई की FIR और चार्जशीट को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, उन्हें निचली अदालत में व्यक्तिगत पेशी से छूट दी गई है।

Lalu Yadav: Supreme Court का फैसला, FIR रद्द करने से इनकार

Supreme Court ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा दर्ज FIR और दाखिल चार्जशीट को इस स्तर पर रद्द नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि अभियोजन की मंजूरी को लेकर उठाए गए सवालों पर फिलहाल हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

हालांकि, अदालत ने यह जरूर कहा कि इस मुद्दे को ट्रायल के दौरान निचली अदालत में उठाया जा सकता है। इससे साफ है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस मामले को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस चल रही है।

राहत भी मिली, पेशी से छूट

जहां एक तरफ अदालत ने याचिका खारिज कर दी, वहीं दूसरी ओर लालू यादव को आंशिक राहत भी दी गई है।सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी है। इसका मतलब है कि वे अपने वकीलों के जरिए केस की पैरवी कर सकते हैं।

एवरग्रीन नजरिए से देखें तो ऐसे मामलों में अदालत का यह संतुलित रवैया आम होता है, जहां एक तरफ कानूनी प्रक्रिया को जारी रखा जाता है, वहीं आरोपी को कुछ राहत भी दी जाती है।विशेषज्ञों का मानना है कि अब इस केस की दिशा निचली अदालत में होने वाली सुनवाई तय करेगी।फिलहाल यह मामला खत्म नहीं हुआ है और आगे की सुनवाई में कई अहम मोड़ आ सकते हैं।

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