India-US trade agreement: नमस्कार मैं सौरभ ठाकुर samastipurnews.in से आपको बताते चले की आज की तारीख़ 4 जुलाई 2025 को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US trade agreement) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बहस सामने आई है। इस समझौते से देश के किसानों, खाद्य सुरक्षा, और स्वास्थ्य से जुड़ी कई चिंताएं जुड़ी हुई हैं। नीति आयोग द्वारा जारी वर्किंग पेपर में जीएम (Genetically Modified) फसलों के आयात की सिफारिश के बाद यह विषय और भी विवादों में आ गया है।

India-US trade agreement: किसानों के हितों पर मंडरा रहा खतरा

नीति आयोग की सिफारिशों के अनुसार प्रस्तावित India-US trade agreement के अंतर्गत मक्का, सोया, चावल, काली मिर्च, झींगा, डेयरी उत्पाद, सेब, बादाम, पिस्ता जैसे जैव परिवर्द्धित (जीएम) उत्पादों का आयात खोलने की बात कही गई है। ये सभी वो उत्पाद हैं, जिन्हें अमेरिका में मानव उपभोग के लिए नहीं बल्कि जानवरों के चारे या एथनॉल उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है।

भारत में GM फसलों का विरोध क्यों हो रहा है?

भारत में लंबे समय से GM फसलों का विरोध होता आ रहा है। इसका पहला कारण यह है कि ये फसलें हर्बिसाइड-टॉलरेंट होती हैं, यानी इनके साथ प्रयोग किए जाने वाले रसायन (शाकनाशक) कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। अमेरिका में कैंसर के मामले भारत से तीन गुना अधिक हैं — यह एक बड़ा संकेत है।

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