मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘प्रगति यात्रा’ से पहले मुजफ्फरपुर के चंदवारा के बहुचर्चित अर्धनिर्मित पुल का रंग-रोगन कराया जा रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि 45 करोड़ की लागत से 2018 में बनकर तैयार हुआ यह पुल आज भी चालू नहीं हो सका। पुल का एप्रोच पथ अब तक नहीं बन पाया है, जिससे इसे उपयोग में नहीं लाया जा सकता।
पुल का इतिहास और निर्माण में देरी
2014-15 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पुल का शिलान्यास किया था। यह योजना 2017-18 में ही पूरी होनी थी। चंदवारा पुल शहर के पूर्वी इलाकों को एनएच-57 (मुजफ्फरपुर-दरभंगा) से जोड़ने के लिए बनाया गया था। इस पुल से दरभंगा की दूरी 10-15 किलोमीटर तक कम हो सकती थी। लेकिन 10 साल बाद भी एप्रोच पथ के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा नहीं हो पाया।
पुल के निर्माण के दौरान कई बार रुकावटें आईं। कभी पुल का पाया बह गया तो कभी उसके टेढ़े होने की समस्या आई। जैसे-तैसे पुल का ढांचा तैयार कर दिया गया, लेकिन एप्रोच पथ के अभाव में इसका लाभ जनता को नहीं मिल पाया।
भूमि अधिग्रहण में देरी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 14 फरवरी के दौरे के दौरान भूमि अधिग्रहण के लिए राशि जारी करने की घोषणा की थी। इसके बावजूद 10 महीने बाद भी भूमि अधिग्रहण का काम अधूरा है। इस वजह से यह पुल आज भी अर्धनिर्मित स्थिति में है।
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मुख्यमंत्री के आगमन से पहले तैयारी
27 दिसंबर को मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए आनन-फानन में इस अधूरे पुल का रंग-रोगन कराया जा रहा है। प्रशासन इसे चमकाने में जुटा हुआ है। पुल के चालू होने से अखाड़ा घाट पुल पर यातायात का दबाव कम होगा। मुसहरी और समस्तीपुर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए यह पुल एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।
डीएम का बयान
जिला अधिकारी (डीएम) ने कहा कि मुख्यमंत्री की यात्रा के दौरान निर्माण से जुड़ी समस्याओं को उठाया जाएगा। प्रशासन पुल को जल्द चालू कराने की कोशिश कर रहा है।
पुल चालू होने से क्या होंगे फायदे
पुल चालू होने से:
- दरभंगा की ओर जाने वाले वाहनों को 10-15 किलोमीटर का फासला कम करना पड़ेगा।
- मुसहरी की ओर से दरभंगा जाने वाले और समस्तीपुर की ओर से आने वाले वाहनों को शहर के अंदरूनी जाम से बचने का मौका मिलेगा।
- अखाड़ा घाट पुल का ट्रैफिक लोड काफी हद तक घट जाएगा।
निष्कर्ष
चंदवारा पुल का निर्माण मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों के लोगों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है। हालांकि, एप्रोच पथ की कमी और प्रशासनिक सुस्ती ने इसे जनता के लिए बेकार बना दिया है। मुख्यमंत्री की प्रगति यात्रा के दौरान इसे लेकर क्या नए कदम उठाए जाते हैं, यह देखना बाकी है।
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