MP Board Exam: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से सामने आए एक मामले ने परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक शिक्षिका ने कक्षा 10वीं की परीक्षा के दौरान अंग्रेजी प्रश्नपत्र की फोटो लेकर उसे ऑनलाइन साझा कर दिया। घटना सामने आते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षिका को निलंबित कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि फोटो अनुपस्थित छात्र की कॉपी से लिया गया था। मामले की पुष्टि के बाद परीक्षा केंद्र की व्यवस्था बदली गई और परीक्षा दोबारा शांतिपूर्वक पूरी कराई गई।
MP Board Exam पेपर लीक कैसे हुआ और जांच में क्या मिला
जांच अधिकारियों के अनुसार सुबह परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद शिक्षिका ने प्रश्नपत्र की तस्वीर खींची। बाद में यह तस्वीर सोशल मीडिया पर दिखाई दी, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि यह Board Exam, Whatsapp, MP से जुड़ा मामला था, जहां प्रश्नपत्र को निजी माध्यम से आगे भेजा गया।पूछताछ में शिक्षिका ने स्वीकार किया कि वह कुछ छात्रों तक प्रश्न पहुंचाने की कोशिश कर रही थीं। इसे गंभीर परीक्षा अनियमितता माना गया। प्रशासन ने तुरंत परीक्षा केंद्र अध्यक्ष को भी हटाया ताकि निष्पक्षता बनी रहे। इसके बाद केंद्र पर अतिरिक्त पर्यवेक्षक लगाए गए और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए।
इस घटना ने एक बार फिर paper leak case और exam security system पर चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल डिवाइस के बढ़ते उपयोग के कारण परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और सख्त करनी होगी। कई राज्यों में पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, इसलिए अब कैमरा निगरानी और मोबाइल प्रतिबंध को जरूरी कदम माना जा रहा है।
प्रशासन की कार्रवाई और भविष्य के लिए सबक
जिला प्रशासन ने घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए तुरंत निलंबन आदेश जारी किया। साथ ही पुलिस ने अलग से जांच शुरू की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्र आगे किन-किन लोगों तक पहुंचा। यह कार्रवाई छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी मानी जा रही है।शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अब digital monitoring और education department rules को और सख्त किया जाएगा।
परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल प्रतिबंध, अलग निरीक्षण दल और रैंडम चेकिंग जैसे उपाय लागू किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे जरूरी है। एक छोटी लापरवाही हजारों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
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