14 फरवरी 2026 को Jharkhand बोकारो जिले में अफवाह के कारण बड़ा बवाल हो गया। बच्चा चोरी की झूठी बात फैलते ही लोगों की भीड़ ने पांच साधुओं को घेर लिया और उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और सभी को सुरक्षित निकाला। जांच में सामने आया कि साधु निर्दोष थे और घटना पूरी तरह अफवाह के कारण हुई। यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया अफवाहों और भीड़ हिंसा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अफवाह से हिंसा तक: कैसे बढ़ा मामला
स्थानीय लोगों के अनुसार इलाके में कुछ दिनों से बच्चा चोरी की चर्चाएं चल रही थीं। किसी ने साधुओं को संदिग्ध बताकर वीडियो वायरल कर दिया। इसके बाद लोग बिना पुष्टि किए इकट्ठा हो गए। इसी दौरान भीड़ ने हमला कर दिया।पुलिस ने बताया कि Jharkhand के इस इलाके में साधु धार्मिक यात्रा पर थे और गांव-गांव घूम रहे थे। लेकिन अफवाह फैलते ही माहौल तनावपूर्ण बन गया। सोशल मीडिया पर फैले मैसेज ने लोगों के डर को बढ़ा दिया। यही डर हिंसा में बदल गया।
यह घटना दिखाती है कि mob lynching, rumour spread, social media misinformation जैसे मामलों में अक्सर तथ्य पीछे रह जाते हैं और भावनाएं आगे निकल जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण ऐसी घटनाएं जल्दी भड़कती हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि “पहले जानकारी, फिर प्रतिक्रिया” की आदत विकसित करना बेहद जरूरी है। नहीं तो निर्दोष लोग हिंसा का शिकार होते रहेंगे।
Jharkhand पुलिस कार्रवाई और आगे की चेतावनी
मौके पर पहुंची पुलिस ने भीड़ को हटाया और साधुओं को अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक इलाज के बाद उनकी हालत स्थिर बताई गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि उनके पास से कोई संदिग्ध सामान नहीं मिला। इसके बाद अफवाह फैलाने वालों की पहचान शुरू कर दी गई है।प्रशासन ने कहा कि अफवाह फैलाना और हिंसा करना दोनों गंभीर अपराध हैं। ऐसे मामलों में आईटी एक्ट और आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई होगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी मैसेज को शेयर करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें।
यह घटना बताती है कि public safety, law and order और अफवाह से बचाव के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी है। पुलिस ने गांवों में जागरूकता अभियान शुरू करने की बात कही है। स्कूलों और पंचायत स्तर पर भी लोगों को डिजिटल साक्षरता समझाई जाएगी।
भीड़ हिंसा केवल कानून का नहीं बल्कि सामाजिक भरोसे का भी संकट है। एक अफवाह कई परिवारों को बर्बाद कर सकती है। इसलिए हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि बिना जांच के किसी पर शक न करें। प्रशासन, मीडिया और समाज — तीनों की संयुक्त भूमिका ही ऐसे मामलों को रोक सकती है।
यह भी पढ़ें:- Bihar Assembly Election 2025: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बदला समीकरण, दलित-आदिवासी वोट पर नजर

















