India-France Deal भारत और फ्रांस के बीच सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कर्नाटक के वेमगल में टाटा-एयरबस की H125 हेलिकॉप्टर असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन किया। इस कदम को रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह पहल सैन्य उपयोग के साथ नागरिक सेवाओं जैसे एयर एम्बुलेंस और आपदा प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाएगी।
H125 हेलिकॉप्टर प्रोजेक्ट से एयरोस्पेस सेक्टर को नई उड़ान
H125 हेलिकॉप्टर एक लाइट यूटिलिटी प्लेटफॉर्म है जिसे सेना, पुलिस, मेडिकल इमरजेंसी और रेस्क्यू ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत में इसकी असेंबली लाइन लगने से न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को भी मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना “Make in India” और “Defence Manufacturing” को तेजी देगी।
इस सहयोग के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, लोकल सप्लाई चेन डेवलपमेंट और स्किल डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में भारत हेलिकॉप्टर निर्माण और मेंटेनेंस का क्षेत्रीय हब बने।यही कारण है कि India-France Deal को रणनीतिक साझेदारी से आगे बढ़कर औद्योगिक सहयोग के रूप में देखा जा रहा है।
नवाचार वर्ष और टेक्नोलॉजी सहयोग की नई शुरुआत
दोनों देशों ने 2026 को “भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष” के रूप में मनाने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप, रिसर्च और एडवांस टेक्नोलॉजी में संयुक्त काम को बढ़ावा देना है। इसी के तहत तीन बड़े संस्थान स्थापित किए जाएंगे — AI in Health Centre, Digital Science & Technology Centre और Aeronautics Skill Centre।यह पहल छात्रों, शोधकर्ताओं और MSME सेक्टर के लिए नए अवसर खोलेगी। सरकार का मानना है कि इससे हेल्थकेयर, एजुकेशन और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में नई तकनीक विकसित होगी।
कूटनीतिक स्तर पर भी यह सहयोग अहम माना जा रहा है क्योंकि दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और टेक्नोलॉजी साझेदारी को मजबूत करना चाहते हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक, यह केवल रक्षा समझौता नहीं बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए टेक्नोलॉजी साझेदारी का मॉडल बन सकता है। इसी व्यापक सहयोग को India-France Deal के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, जहां सरकारें ही नहीं बल्कि उद्योग और युवा भी जुड़ेंगे।
भारत और फ्रांस का यह सहयोग सिर्फ एक हेलिकॉप्टर प्लांट तक सीमित नहीं है। यह रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत है। आने वाले वर्षों में इससे रोजगार, निवेश और तकनीकी क्षमता तीनों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। अगर योजनाएं तय दिशा में आगे बढ़ती हैं, तो भारत एयरोस्पेस और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनने की ओर तेजी से बढ़ सकता है।
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