Google Gemini करेगा खाना ऑर्डर, कैब बुक, बिना फोन छुए!

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक और बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। Google अपने AI सिस्टम को पहले से ज्यादा स्मार्ट और कामकाजी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में Google Gemini को एक ऐसे पर्सनल असिस्टेंट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो यूजर के रोजमर्रा के कई काम बिना फोन को छुए ही पूरे कर सकेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फीचर फिलहाल टेस्टिंग स्टेज में है और आने वाले समय में मोबाइल इस्तेमाल करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।

Gemini ऑटोमेशन फीचर क्या है और कैसे करेगा काम

गूगल ऐप के नए बीटा वर्जन में एक खास ऑटोमेशन फीचर की झलक देखने को मिली है, जिसका कोडनेम “bonobo” बताया जा रहा है। इस फीचर के जरिए AI आपकी स्क्रीन पर चल रही गतिविधियों को समझेगा और अलग-अलग ऐप्स के साथ इंटरैक्ट करेगा। मतलब, यूजर को किसी ऐप को खोलने या स्क्रीन टैप करने की जरूरत नहीं होगी।

एक बार कमांड देने के बाद यह सिस्टम खाना ऑर्डर करने, कैब बुक करने, शॉपिंग करने या कॉल लगाने जैसे काम खुद कर सकेगा। यह पूरा प्रोसेस वॉयस कमांड और स्क्रीन अंडरस्टैंडिंग के जरिए होगा। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह फीचर Android 16 के आने वाले अपडेट्स के साथ कुछ चुनिंदा ऐप्स पर ही काम करेगा। गूगल का फोकस इस तकनीक को इतना सहज बनाने पर है कि यूजर को अलग-अलग स्टेप्स याद रखने की जरूरत ही न पड़े।

यूजर्स के लिए फायदे और संभावित जोखिम

इस तरह का ऑटोमेशन फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, जो मल्टीटास्किंग करते हैं या फोन कम इस्तेमाल करना चाहते हैं। ड्राइविंग के दौरान कैब बुक करना, मीटिंग के बीच खाना ऑर्डर करना या किसी जरूरी कॉल को हैंड्स-फ्री तरीके से लगाना अब आसान हो सकता है।

हालांकि, इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। ऑटोमेटेड सिस्टम अगर गलत समय पर या गलत तरीके से ऑर्डर प्लेस कर दे, तो उसकी जिम्मेदारी यूजर पर ही होगी। इसी वजह से गूगल यूजर्स को यह सलाह दे रहा है कि वे पेमेंट डिटेल्स ऑटोमेशन के भरोसे न छोड़ें और जरूरी फैसलों में मैन्युअल कंट्रोल बनाए रखें। कंपनी का कहना है कि इमरजेंसी या संवेदनशील कामों में AI के बजाय खुद हस्तक्षेप करना बेहतर रहेगा।

आने वाले समय में क्या बदल सकता है

फिलहाल गूगल ने इस फीचर की आधिकारिक लॉन्च डेट या सपोर्टेड ऐप्स की पूरी लिस्ट साझा नहीं की है। लेकिन जिस तरह से टेस्टिंग से जुड़ी जानकारियां सामने आ रही हैं, उससे साफ है कि कंपनी AI को सिर्फ सवाल-जवाब तक सीमित नहीं रखना चाहती। आने वाले महीनों में यह तकनीक स्मार्टफोन को एक एक्टिव असिस्टेंट में बदल सकती है, जो यूजर की आदतों और जरूरतों को समझकर खुद फैसले लेने में मदद करे।

यह बदलाव न सिर्फ टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को आसान बनाएगा, बल्कि डिजिटल लाइफस्टाइल को भी नए स्तर पर ले जाएगा। हालांकि, यूजर्स के लिए जरूरी होगा कि वे इस सुविधा का इस्तेमाल सोच-समझकर करें और कंट्रोल हमेशा अपने हाथ में रखें।

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AI ऑटोमेशन: क्या सुविधा के लिए छोड़ेंगे कंट्रोल?

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Srota Swati Tripathy

नमस्ते! मैं हूँ श्रोता स्वाति त्रिपाठी, कंटेंट राइटर जो खबरों को आसान और रोचक अंदाज़ में पेश करती हूँ। उम्मीद है आपको मेरा लिखा कंटेंट पसंद आएगा और पढ़ते-पढ़ते कुछ नया जानने को मिलेगा!

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