गया (बिहार): बिहार के गया जिले में ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रही है। यह विदेशी फल, जो लंबे समय तक उत्पादन देने के लिए जाना जाता है, अब किसानों की पसंदीदा फसल बन गई है। ड्रैगन फ्रूट की खेती में एक बार की लागत होती है, लेकिन इसके बाद यह फसल 20 से 25 वर्षों तक लगातार फल देती रहती है। बाजार में इसकी कीमत 200 से 400 रुपये प्रति किलो तक होती है, जिससे किसानों को मुनाफे की गारंटी मिल रही है।

प्रशिक्षण और अवसर
उद्यान विभाग ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले के 30 किसानों को किशनगंज के डॉ. अब्दुल कलाम कृषि विश्वविद्यालय में विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा था। यहां उन्हें खेती की तकनीक और इसके फायदे के बारे में जानकारी दी गई। गया जिले का पठारी क्षेत्र और यहां की कम वर्षा इस खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है, जिससे उत्पादन में वृद्धि की संभावनाएं और अधिक हो जाती हैं।
जलवायु संबंधी चुनौतियों के समाधान
हालांकि, जिले का बढ़ता तापमान किसानों के लिए चिंता का विषय है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सुझाव दिया है कि अगर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है, तो फसल को सुरक्षित रखने के लिए शेड नेट का उपयोग किया जा सकता है। यह तकनीक तापमान के नुकसान से बचाने में मदद करेगी और उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

किसानों का अनुभव
डोभी के किसान अशोक कुमार और गुरारू के संजय कुमार, जो इस प्रशिक्षण का हिस्सा थे, ने बताया कि उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। उनका कहना है, “हम जल्द ही बड़े पैमाने पर इसकी खेती शुरू करेंगे। जैसे गया जिला मशरूम उत्पादन में अग्रणी है, वैसे ही हम ड्रैगन फ्रूट की खेती में भी सफलता प्राप्त करेंगे।”
ड्रैगन फ्रूट की खेती में उज्जवल भविष्य
ड्रैगन फ्रूट की खेती गया के किसानों के लिए एक नई क्रांति साबित हो रही है। कम लागत, लंबी उत्पादन अवधि और बेहतर मुनाफे के चलते यह फसल गया जिले में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। किसानों को उम्मीद है कि वे इस फसल के जरिए आत्मनिर्भर बन सकेंगे और अपनी आय में बढ़ोतरी कर पाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फसल आने वाले समय में बिहार के कृषि परिदृश्य को बदल सकती है।
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