Bihar Election 2025 Voter Citizenship Update: वोट का हक अब सिर्फ भारतीय नागरिकों को, तीन तिथियों से तय होगी पहचान

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Bihar Election 2025 Voter Citizenship Update: आपको बताते चले की 10 जुलाई 2025 को भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार चुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण शुरू किया है, जिसमें अब वोट देने का अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिकता की सटीक पहचान पर निर्भर करेगा।

तीन तिथियों से तय होगा लोकतंत्र में प्रवेश

भारत निर्वाचन आयोग ने नागरिकता की पुष्टि के लिए तीन प्रमुख तिथियों को आधार बनाते हुए एक नया तंत्र लागू किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सिर्फ भारतीय नागरिक ही मतदान प्रक्रिया में भाग ले सकें।

इसका उद्देश्य न केवल लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखना है, बल्कि वोटर लिस्ट से गैर-नागरिकों को बाहर करना भी है।
यह फैसला उन क्षेत्रों के लिए और भी अहम है जहां सीमाओं पर जनसंख्या विविधता ज़्यादा है — जैसे कि बिहार के सीमावर्ती जिले।

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1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे नागरिक – जन्म ही पहचान

Bihar Election 2025 के लिए नागरिकता सत्यापन पर आधारित वोटर सूची की प्रक्रिया
बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में सटीक नागरिकता जांच का नियम

अगर कोई व्यक्ति 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्मा है, तो उसकी नागरिकता को मान्यता देने के लिए जन्म स्थान और तिथि पर्याप्त मानी जाएगी। उस वक्त भारत की नागरिकता नीति यह मानती थी कि भारत में जन्म लेना ही भारतीय होने की पुष्टि है।

1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 तक जन्म – माता-पिता की नागरिकता आवश्यक

1986 में हुए संविधान संशोधन के बाद यह तय किया गया कि अब सिर्फ भारत में जन्म लेना पर्याप्त नहीं है। इस अवधि में जन्मे व्यक्ति को भारतीय नागरिक तभी माना जाएगा जब उसके माता या पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हों।

3 दिसंबर 2004 के बाद जन्म – दोनों माता-पिता का भारतीय होना जरूरी

इस तारीख के बाद जन्म लेने वाले व्यक्ति को भारत का नागरिक तभी माना जाएगा जब दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों। यह प्रावधान 2004 के नागरिकता कानून में संशोधन के तहत लागू हुआ और इसे अब चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की समीक्षा का आधार बना लिया है।

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मतदाता सूची में सटीकता ही लोकतंत्र की सुरक्षा

निर्वाचन आयोग की यह पहल सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने का एक प्रयास है। इससे वोटर लिस्ट से फर्जी और गैर-कानूनी नामों को हटाया जाएगा, जिससे चुनावों की निष्पक्षता और वैधता दोनों बनी रहेगी।

राजनीतिक और सामाजिक असर – बिहार की सियासत में हलचल

यह निर्णय बिहार चुनाव को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन इलाकों में जो सीमावर्ती और प्रवासी बहुल हैं। विपक्षी दलों ने पहले ही आशंका जताई है कि यह नीति कुछ वर्गों को हाशिये पर डाल सकती है, जबकि आयोग का दावा है कि इसका उद्देश्य केवल Bihar Electoral Identity की पुष्टि है।

मतदान अब सिर्फ अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी

यह बदलाव स्पष्ट करता है कि अब भारत में वोट देने के लिए सिर्फ आधार कार्ड या फोटो पहचान काफी नहीं है। अब नागरिकता की कानूनी और संवैधानिक पुष्टि जरूरी है। यानी वोटिंग अब सिर्फ एक अधिकार नहीं, बल्कि भारतीय नागरिक होने की साक्ष्य-युक्त जिम्मेदारी भी है।

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Bihar Election 2025: लोकतंत्र की कसौटी पर नई प्रणाली

इस नई प्रणाली से बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को एक नया और ऐतिहासिक मोड़ मिल सकता है। जिन लोगों के पास तीन तिथियों में से कोई एक का स्पष्ट साक्ष्य होगा, वही मतदान प्रक्रिया में शामिल हो पाएंगे।

क्या यह राष्ट्रीय नीति का प्रारूप बन सकता है?

अगर बिहार में यह मॉडल सफल होता है, तो भारत के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इससे देश भर में चुनाव प्रणाली अधिक पारदर्शी और संवैधानिक हो जाएगी।

भारत निर्वाचन आयोग की यह नीति एक स्पष्ट संदेश देती है – नागरिकता के प्रमाण के बिना अब कोई भी व्यक्ति मतदान प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकता। यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करेगा, वोटिंग प्रणाली को निष्पक्ष बनाएगा और संविधान की रक्षा करेगा।

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Saurabh Thakur

Saurabh Thakur is the Founder and CEO of SamastipurNews.in, a prominent news website known for delivering reliable and comprehensive coverage of Samastipur and regional news. With over a decade of experience in the media industry, Saurabh has established himself as a seasoned journalist and dedicated news editor.

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