Bharat Vistaar Yojna केंद्र सरकार ने देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने के लक्ष्य के साथ नई विकास पहल की रूपरेखा पर काम तेज कर दिया है। इसी क्रम में Bharat Vistaar Yojna को एक व्यापक राष्ट्रीय विस्तार मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मकसद शहरों से लेकर दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों तक समान सुविधाएँ पहुँचाना है। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार और डिजिटल समावेशन को नई दिशा दे सकती है।
Bharat Vistaar Yojna का उद्देश्य और किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
सरकार की इस पहल का मूल उद्देश्य देश में infrastructure development, digital connectivity और rural economy को एक साथ मजबूत करना है। योजना के तहत छोटे शहरों और गांवों में सड़क, इंटरनेट, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता में रहेगा।सूत्रों के अनुसार Bharat Vistaar Yojna के जरिए सरकार उन जिलों पर खास ध्यान देगी जहां अभी भी बुनियादी सेवाओं की कमी है। इसमें ग्रामीण ब्रॉडबैंड, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा और ई-गवर्नेंस सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे लोगों को शहरों में पलायन कम करना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बड़ी आबादी अभी भी अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में अगर वहीं पर इंडस्ट्री, स्किल ट्रेनिंग और डिजिटल सर्विस सेंटर विकसित किए जाते हैं तो आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ सकती हैं।इसके साथ-साथ सरकार ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन को भी इस कार्यक्रम का प्रमुख आधार बना सकती है। स्थानीय कारीगरों, किसानों और छोटे कारोबारियों को ऑनलाइन मार्केट से जोड़ने की योजना भी प्रस्तावित बताई जा रही है, जिससे उन्हें सीधे ग्राहकों तक पहुंच मिलेगी और आय में सुधार होगा।
अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर संभावित असर
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल भारत के दीर्घकालिक विकास मॉडल को बदल सकती है। जब डिजिटल और भौतिक सुविधाएं छोटे शहरों तक पहुंचेंगी तो उद्योगों का दबाव बड़े महानगरों से कम होगा और संतुलित विकास संभव होगा।Bharat Vistaar Yojna के तहत स्किल सेंटर, स्टार्टअप हब और छोटे मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किए जा सकते हैं। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर नौकरी मिलेगी और माइग्रेशन कम होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे देश की उत्पादकता और उपभोक्ता बाजार दोनों बढ़ेंगे।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। टेलीमेडिसिन और डिजिटल क्लासरूम के जरिए दूरस्थ इलाकों के लोगों को भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इससे सामाजिक असमानता कम करने में मदद मिलेगी।लंबे समय में यह योजना भारत की अर्थव्यवस्था को केवल शहर आधारित मॉडल से हटाकर संतुलित क्षेत्रीय विकास की ओर ले जा सकती है। यही कारण है कि नीति विशेषज्ञ इसे अगले दशक की सबसे महत्वपूर्ण विकास पहल मान रहे हैं।
यह योजना पूरी तरह लागू होने के बाद भारत में विकास का मॉडल “मेट्रो-केंद्रित” से “जन-केंद्रित” होने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
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