नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026 — गणतंत्र दिवस समारोहों का औपचारिक समापन बुधवार शाम ऐतिहासिक beating retreat समारोह के साथ हुआ। रायसीना हिल, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की रोशनी से सजी पृष्ठभूमि में भारतीय थलसेना, नौसेना, वायुसेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के संयुक्त बैंड्स ने सटीक तालमेल के साथ मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। संगीत की लहरियों के बीच देश की सैन्य परंपरा, अनुशासन और एकता का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला।
Beating Retreat: भव्य संगीत संध्या और शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी
इस गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति, जो सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं, सहित कई वरिष्ठ गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कुल 30 संगीतमय प्रस्तुतियों में पारंपरिक और आधुनिक भारतीय रचनाओं का संतुलित चयन किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत की समृद्ध सैन्य विरासत को दर्शाता है और उन सैनिकों पर राष्ट्रीय गर्व को और मजबूत करता है जो देश की रक्षा में अपना जीवन समर्पित करते हैं।
रक्षा मंत्री ने इसे एक गंभीर और सम्मानपूर्ण परंपरा बताया, जो सशस्त्र बलों के मूल्यों—अनुशासन, एकता और कर्तव्यनिष्ठा—का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह समारोह नागरिकों को देश की सामूहिक शक्ति और साझा मूल्यों की याद दिलाता है।
इतिहास से वर्तमान तक: परंपरा का अर्थ
Beating Retreat की परंपरा 17वीं शताब्दी से जुड़ी मानी जाती है, जब सूर्यास्त के समय ढोल-नगाड़ों की थाप से युद्धभूमि से लौटने और शिविर में प्रवेश का संकेत दिया जाता था। समय के साथ यह सैन्य दिनचर्या के समापन और सम्मान की अभिव्यक्ति का प्रतीक बन गई। आज यह परंपरा गणतंत्र दिवस के तीन दिवसीय उत्सवों के अंत का संकेत देती है और नागरिकों को राष्ट्र के प्रति सेवा, अनुशासन और एकजुटता जैसे मूल्यों पर चिंतन का अवसर देती है।
Beating Retreat समारोह का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किया गया, जिससे देश-विदेश में बैठे दर्शक भी इस अनुभव का हिस्सा बने।
समापन का संदेश और राष्ट्रीय भावना
इस वर्ष का समारोह अपनी भव्यता, सटीक समन्वय और भावनात्मक प्रस्तुति के कारण खास रहा। रोशन इमारतों के बीच गूंजते बैंड्स के सुरों ने दर्शकों को राष्ट्रभक्ति से भर दिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भारत की सैन्य शक्ति केवल हथियारों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और अनुशासन से भी सशक्त होती है।जब अंतिम धुन के साथ रोशनी मंद हुई, तब गणतंत्र दिवस के उत्सवों का औपचारिक समापन हुआ—और साथ ही देशवासियों के मन में अपने सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान और गर्व और गहरा हो गया।
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