Australia का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान के लिए $50 Million Aid, दुनिया की नजरें टिकीं

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कैनबरा, 29 जनवरी 2026 — अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मानवीय संकट के लिहाज़ से आज का दिन अहम रहा। Australia ने अफगानिस्तान में बिगड़ती मानवीय स्थिति को देखते हुए 5 करोड़ Australia डॉलर की अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की है। यह मदद ऐसे समय आई है, जब तालिबान शासन के तहत देश गंभीर आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है।

विदेश मंत्री पेनी वोंग ने साफ शब्दों में कहा कि अफगानिस्तान दुनिया के सबसे लंबे और जटिल मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है। खासकर महिलाओं और लड़कियों की स्थिति लगातार खराब हो रही है, जिसे लेकर ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।

Australia में क्यों ज़रूरी हुई यह मदद?

अफगानिस्तान में इस वक्त करीब 2.2 करोड़ लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं। तालिबान के सत्ता में आने के बाद रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी लगभग खत्म हो गई है।ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि बुनियादी जरूरतें पूरी करने में तालिबान की विफलता ने हालात को और भयावह बना दिया है।

इसी वजह से यह नई सहायता खासतौर पर खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा पर केंद्रित होगी। सहायता संयुक्त राष्ट्र के भरोसेमंद संगठनों जैसे विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और यूएन मानवीय कोष के जरिए ज़मीनी स्तर तक पहुंचाई जाएगी।

महिलाओं और लड़कियों पर विशेष फोकस

Australia ने तालिबान द्वारा महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए प्रतिबंधों की तीखी आलोचना की है। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि यह हालात CEDAW (महिलाओं के खिलाफ भेदभाव उन्मूलन कन्वेंशन) का खुला उल्लंघन हैं।इसी के चलते ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय साझेदार देशों के साथ मिलकर तालिबान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी जारी रखे हुए है।

सरकार का स्पष्ट कहना है कि यह सहायता सिर्फ राहत नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा का भी एक मजबूत संदेश है।

बच्चों का कुपोषण बना सबसे बड़ा संकट

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के मुताबिक, अफगानिस्तान इस समय दुनिया के सबसे गंभीर बाल कुपोषण संकटों में से एक से गुजर रहा है।हर साल करीब 37 लाख बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। आर्थिक पतन, सूखा और मानवीय सहायता की कमी ने हालात और बदतर कर दिए हैं।विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि 90% से ज्यादा अफगान परिवार पर्याप्त भोजन खरीदने में असमर्थ हैं, जिससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर स्थायी असर पड़ने का खतरा है।

आगे क्या? Australia ने साफ किया है कि यह सहायता जान बचाने, पीड़ा कम करने और बुनियादी जरूरतें पूरी करने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अफगानिस्तान के लिए और समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज हो सकती हैं।

यह फैसला न सिर्फ मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर Australia की जिम्मेदार भूमिका को भी रेखांकित करता है। अफगान जनता के लिए यह मदद एक उम्मीद की किरण बनकर आई है, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए।

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अफगानिस्तान को सहायता: मानवाधिकारों का सम्मान या मानवीय ज़रूरतें?

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Srota Swati Tripathy

नमस्ते! मैं हूँ श्रोता स्वाति त्रिपाठी, कंटेंट राइटर जो खबरों को आसान और रोचक अंदाज़ में पेश करती हूँ। उम्मीद है आपको मेरा लिखा कंटेंट पसंद आएगा और पढ़ते-पढ़ते कुछ नया जानने को मिलेगा!

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