India AI Summit: नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक टेक सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने साफ कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य कुछ देशों या अरबपतियों के हाथ में सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सभी देशों की भागीदारी के साथ साझा नियम बनाने पर जोर दिया और भारत की पहल को “ग्लोबल साउथ की आवाज” बताया। इसी मंच पर AI summit 2026 वैश्विक सहयोग और जिम्मेदार टेक्नोलॉजी उपयोग की दिशा में अहम पड़ाव बनता दिखा।
India AI Summit: वैश्विक सहयोग पर जोर, क्यों अहम है यह संदेश
नई दिल्ली में हुए India AI Summit 2026 को संबोधित करते हुए UN प्रमुख ने कहा कि AI सिर्फ टेक कंपनियों का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र को प्रभावित करेगा। इसलिए Global Governance Framework बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि AI को विकसित करते समय fairness, transparency और accountability जैसे सिद्धांत अपनाने होंगे।भारत की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि विकासशील देशों की जरूरतें अलग हैं। कई देशों में अभी भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है।
ऐसे में AI Policy केवल अमीर देशों के अनुसार नहीं बन सकती। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के तहत साझा प्लेटफॉर्म बनाने की बात कही, ताकि छोटे देश भी निर्णय प्रक्रिया में शामिल हो सकें।विशेषज्ञों का मानना है कि Responsible AI और Data Privacy अब आने वाले समय के सबसे बड़े मुद्दे होंगे। अगर शुरुआती दौर में सही नियम नहीं बने तो गलत सूचना, डीपफेक और नौकरी बाजार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह और महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां तेजी से Digital Economy बढ़ रही है।
भारत की पहल और भविष्य पर असर
India AI Summit में भारत को ग्लोबल साउथ की आवाज बताया गया। यहां चर्चा सिर्फ टेक्नोलॉजी पर नहीं बल्कि सामाजिक प्रभाव पर भी हुई। सरकार ने Skill Development, AI Research और स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ने की रणनीति पेश की। माना जा रहा है कि आने वाले समय में AI Education और Workforce Training सबसे बड़ी प्राथमिकता बनेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत के पास बड़ा डेटा बेस और युवा आबादी है। इससे Innovation Ecosystem मजबूत हो सकता है, लेकिन साथ ही Cyber Security और Ethics Framework बनाना भी जरूरी है। इसी संदर्भ में AI summit 2026 में कई देशों ने साझा रिसर्च और टेक्नोलॉजी एक्सचेंज पर सहमति जताई।
यह पहल लंबे समय में हेल्थकेयर, कृषि और शिक्षा क्षेत्रों को बदल सकती है। उदाहरण के तौर पर AI आधारित हेल्थ डायग्नोसिस और स्मार्ट खेती समाधान ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं। यही कारण है कि इस सम्मेलन को सिर्फ एक इवेंट नहीं बल्कि भविष्य की वैश्विक नीति की शुरुआत माना जा रहा है।
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