JEE MAINS: देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक में इस बार एक ऐसा संयोग देखने को मिला जिसने छात्रों से लेकर विशेषज्ञों तक सबको हैरान कर दिया। भुवनेश्वर के जुड़वां भाई मस्रूर और महरूप खान ने परीक्षा में बिल्कुल समान अंक हासिल किए। दोनों ने 300 अंकों के पेपर में एक जैसे स्कोर के साथ ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिस पर अब शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह भी सामने आई कि दोनों की पढ़ाई की आदतें, तैयारी का तरीका और कई व्यक्तिगत चीजें भी काफी मिलती-जुलती हैं।
JEE MAINS:कैसे हुआ यह अनोखा परिणाम और क्यों है खास
यह मामला तब चर्चा में आया जब JEE MAINS का परिणाम घोषित हुआ और दोनों भाइयों का स्कोर बिल्कुल एक जैसा पाया गया। इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में यह घटना बेहद दुर्लभ मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इतने बड़े प्रतियोगी एग्जाम में प्रश्नों के अलग-अलग प्रयास, निगेटिव मार्किंग और समय प्रबंधन के कारण अंक समान आना लगभग असंभव जैसा होता है।बताया जा रहा है कि दोनों ने एक ही स्कूल से पढ़ाई की और एक साथ joint preparation की।
वे रोजाना मिलकर सवाल हल करते थे और एक-दूसरे की गलतियां सुधारते थे। परिवार के अनुसार दोनों की पढ़ने की स्पीड भी लगभग बराबर है। यहां तक कि उनका चश्मे का नंबर और जूते का साइज भी समान बताया गया है।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ मेहनत नहीं बल्कि genetic similarity और समान वातावरण का असर भी हो सकता है। जब दो बच्चे एक जैसी सोच, अभ्यास और रणनीति अपनाते हैं तो उनका प्रदर्शन भी समान हो सकता है। हालांकि इतने बड़े स्तर पर ऐसा होना बहुत कम देखने को मिलता है, इसलिए यह घटना छात्रों के लिए प्रेरणा भी बन रही है।
छात्रों के लिए क्या सीख और आगे की तैयारी
इस अनोखी घटना ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की सफलता केवल टैलेंट से नहीं बल्कि नियमित अभ्यास और सही रणनीति से मिलती है। दोनों भाइयों ने हर दिन तय समय पर पढ़ाई की और exam strategy को लगातार बेहतर बनाया।आज के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं। ऐसे में समान अंक आना यह दिखाता है कि competitive exam में सफलता का फॉर्मूला स्पष्ट है — नियमित रिवीजन, टेस्ट एनालिसिस और समय प्रबंधन।
छात्रों को चाहिए कि वे केवल रटने के बजाय कॉन्सेप्ट पर ध्यान दें और हर मॉक टेस्ट के बाद अपनी कमजोरियां पहचानें।मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि भाई-बहन या स्टडी पार्टनर के साथ पढ़ाई करने से मोटिवेशन बना रहता है। इससे मानसिक दबाव कम होता है और प्रदर्शन बेहतर होता है। यही कारण है कि अब कई कोचिंग संस्थान भी ग्रुप स्टडी को बढ़ावा दे रहे हैं।इस घटना ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और सही दिशा मिले तो असंभव भी संभव हो सकता है। कभी-कभी परिणाम सिर्फ मेहनत नहीं बल्कि तालमेल और अनुशासन का भी आईना बन जाता है — और यही सफलता की असली कुंजी है।
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