India AI Summit: भारत मंडपम में चल रहे टेक इवेंट के दौरान गूगल ने बड़ी घोषणाएं कीं। कंपनी ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, सरकारी सेवाओं में टेक्नोलॉजी उपयोग बढ़ाने और रिसर्च को सपोर्ट देने के लिए नई पहल और फंडिंग प्रोग्राम लॉन्च किए। इस मौके पर गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की। खास बात यह रही कि कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा कनेक्टिविटी और रिसर्च सहयोग बढ़ाने का रोडमैप पेश किया।
AI कनेक्टिविटी और ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
गूगल ने बताया कि वह India–America Connect Initiative शुरू करेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत नए फाइबर-ऑप्टिक और सब-सी केबल नेटवर्क तैयार किए जाएंगे। इससे डेटा ट्रांसफर तेज होगा और AI आधारित सेवाओं को बेहतर सपोर्ट मिलेगा। कंपनी का कहना है कि यह नेटवर्क भारत, अमेरिका और ग्लोबल साउथ के कई हिस्सों को जोड़ेगा।यह घोषणा India AI Summit 2026 के मंच से की गई, जहां कंपनी ने डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार हाई-स्पीड डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी आधुनिक टेक अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। बेहतर नेटवर्क से क्लाउड कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग मॉडल और रियल-टाइम प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर तेजी से आगे बढ़ते हैं।गूगल DeepMind ने भी कहा कि वह भारतीय संस्थानों के साथ मिलकर रिसर्च मॉडल्स की पहुंच बढ़ाएगा। इससे हेल्थ, एग्रीकल्चर और क्लाइमेट जैसे क्षेत्रों में इनोवेशन को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही इनोवेशन हब बनाए जाएंगे जहां जनरेटिव AI टूल्स का प्रयोग होगा।
$60 मिलियन फंड और सरकारी सेवाओं में AI का विस्तार
कंपनी ने Google.org के जरिए दो बड़े ग्रांट प्रोग्राम्स लॉन्च किए। पहला AI for Government Innovation Impact Challenge है। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को डिजिटल बनाना है। दूसरा AI for Science Impact Challenge है जो वैज्ञानिक शोध को तेज करने में मदद करेगा। दोनों मिलाकर कुल 60 मिलियन डॉलर की फंडिंग होगी।इस दौरान बताया गया कि दुनियाभर में लगभग 75% सरकारी कर्मचारी पहले से AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन कई जगह इनका सही उपयोग नहीं हो पा रहा। नई पहल का लक्ष्य प्रशिक्षण और व्यवहारिक उपयोग को बढ़ाना है।
इसके अलावा मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी कर्मचारियों की ट्रेनिंग में टेक्नोलॉजी को शामिल किया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र के लिए लाइव स्पीच-टू-स्पीच ट्रांसलेशन, सेल्फ-स्टडी फीचर और एंट्रेंस एग्जाम प्रैक्टिस टेस्ट जैसे अपडेट भी पेश किए गए।विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी पहलें डिजिटल गवर्नेंस, सार्वजनिक सेवा और शिक्षा को भविष्य-तैयार बनाएंगी। लंबे समय में इससे स्टार्टअप, रिसर्च और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
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