PM Modi का स्मार्ट चश्मा देख दुनिया हैरान, Sarvam Kaze लॉन्च की तैयारी, Meta Glasses को टक्कर

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Sarvam Kaze : नई दिल्ली में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर चर्चा के बीच एक नया गैजेट चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में एक इवेंट के दौरान PM Modi, Meta Glasses जैसी दिखने वाली स्मार्ट तकनीक को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। इसी बीच भारतीय AI कंपनी Sarvam AI ने अपने पहले स्मार्ट ग्लास डिवाइस Sarvam Kaze का टीज़र जारी कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस रोजमर्रा के कामों को आसान बनाएगा और वॉइस-आधारित डिजिटल अनुभव को नई दिशा देगा।

Sarvam Kaze स्मार्ट ग्लास क्या करेगा अलग?

भारतीय टेक स्टार्टअप Sarvam AI अब सॉफ्टवेयर के बाद हार्डवेयर सेगमेंट में उतर रहा है। कंपनी पहले अपने बड़े भाषा मॉडल और देसी AI समाधान को लेकर चर्चा में रही थी, और अब यह नया डिवाइस पहनने योग्य तकनीक (wearable technology) के क्षेत्र में एंट्री मानी जा रही है।टीज़र के अनुसार यह स्मार्ट ग्लासेस कैमरा, माइक्रोफोन और रियल-टाइम वॉइस असिस्टेंट जैसे फीचर्स के साथ आएंगे। इसमें voice assistant, real-time translation और AI camera जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। इसका मतलब यूजर केवल बोलकर जानकारी खोज सकेगा, फोटो ले सकेगा और अलग-अलग भाषाओं को समझ पाएगा।

हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करने की संभावना इसे खास बनाती है, क्योंकि यही क्षेत्र अब टेक कंपनियों के लिए सबसे बड़ा बाजार बन रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मोबाइल फोन की कई जरूरतें ऐसे वियरेबल डिवाइस से पूरी होंगी। खासकर नेविगेशन, मैसेज पढ़ना और लाइव जानकारी पाने जैसे काम सीधे आंखों के सामने दिखाई देंगे। इससे डिजिटल अनुभव ज्यादा नैचुरल हो जाएगा।

बाजार में क्यों बढ़ रही है स्मार्ट ग्लास की दौड़?

दुनिया भर में टेक कंपनियां अब स्क्रीन-फ्री कंप्यूटिंग की दिशा में काम कर रही हैं। यानी यूजर बिना फोन निकाले ही जानकारी देख सके। यही वजह है कि कंपनियां AR-based computing और personal AI devices पर जोर दे रही हैं।इसी संदर्भ में PM Modi, Meta Glasses जैसी तकनीक की चर्चा के बीच Sarvam Kaze को भारतीय विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य ऐसे डिवाइस बनाना है जो भारतीय उपयोगकर्ताओं की जरूरतों के अनुसार काम करे।

यह डिवाइस खास तौर पर wearable AI, smart glasses features और digital privacy जैसे पहलुओं पर केंद्रित हो सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह ऑफलाइन प्रोसेसिंग और स्थानीय भाषा सपोर्ट के साथ आता है तो यह शिक्षा, स्वास्थ्य और यात्रा जैसे क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है। उदाहरण के लिए — छात्र नोट्स सुन सकते हैं, पर्यटक तुरंत अनुवाद देख सकते हैं और प्रोफेशनल मीटिंग में रियल-टाइम जानकारी पा सकते हैं।

भविष्य में क्या बदल सकता है?

भारत तेजी से AI उपभोक्ता बाजार बन रहा है। ऐसे में घरेलू कंपनियों का हार्डवेयर बनाना टेक इकोसिस्टम के लिए अहम कदम माना जा रहा है। इससे डेटा सुरक्षा और स्थानीय इनोवेशन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।Sarvam AI का यह कदम संकेत देता है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन के साथ-साथ पहनने योग्य AI डिवाइस भी रोजमर्रा का हिस्सा बन सकते हैं।

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Srota Swati Tripathy

जगन्नाथ की भूमि और नीले समंदर के किनारों से निकलकर झीलों के शहर भोपाल की एमसीयू यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री कर रहे हैं। सीखने और समझने का दौर अभी भी जारी है। अब 'समस्तीपुर न्यूज़' के कंटेंट राइटर और अपने लेख के लिए जाने जाते हैं|

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