केंद्र सरकार ने 11 फरवरी 2026 को Vande Mataram ,राष्ट्रगीत के गायन और वादन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य सम्मान, एकरूपता और स्पष्टता सुनिश्चित करना है। नए गाइडलाइंस के तहत स्कूल, सरकारी कार्यक्रम और सार्वजनिक आयोजनों में राष्ट्रगीत के प्रस्तुतीकरण के दौरान कुछ निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।सरकार के मुताबिक, यह कदम National Symbols के सम्मान को मजबूत करने और नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है।
Vande Mataram: नए दिशा-निर्देशों में क्या खास?
सरकार द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि वंदे मातरम् के गायन और वादन के दौरान शालीनता और अनुशासन अनिवार्य होगा। आधिकारिक कार्यक्रमों में इसे निर्धारित स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
नए नियमों के अनुसार:
- राष्ट्रगीत के दौरान अनावश्यक शोर या व्यवधान नहीं होना चाहिए।
- Educational institutions में विशेष अवसरों पर इसे सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
- डिजिटल या रिकॉर्डेड संस्करण के उपयोग में भी मूल स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
- किसी भी प्रकार की गलत प्रस्तुति या अपमानजनक व्यवहार पर संबंधित कानून लागू हो सकते हैं।
सरकार ने यह भी कहा है कि National anthem और राष्ट्रगीत के बीच अंतर को समझते हुए दोनों के प्रति समान सम्मान बनाए रखना आवश्यक है।विशेषज्ञों का मानना है कि Cultural heritage और राष्ट्रगान से जुड़े विषयों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश भ्रम की स्थिति को कम करते हैं। इससे एकरूपता भी आती है।
राष्ट्रीय भावना और कानूनी पहलू
सरकार ने साफ किया है कि ये दिशा-निर्देश किसी पर थोपने के लिए नहीं बल्कि गरिमा बनाए रखने के लिए हैं। संविधान में राष्ट्रचिन्हों के सम्मान को नागरिक कर्तव्य बताया गया है।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई संस्था या व्यक्ति राष्ट्रगीत के साथ असम्मानजनक व्यवहार करता है तो उस पर लागू कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि इसे विवाद की बजाय राष्ट्रीय एकता के नजरिए से देखें।
इतिहास के संदर्भ में देखें तो राष्ट्रगीत का विशेष स्थान रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह प्रेरणा का स्रोत बना। आज भी कई सरकारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसे सम्मानपूर्वक प्रस्तुत किया जाता है।सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि National pride और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। स्पष्ट प्रोटोकॉल से भविष्य में अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है।सरकार ने कहा है कि सभी संस्थानों को नए दिशा-निर्देशों की जानकारी जल्द साझा की जाएगी और आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।यह फैसला ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इन दिशा-निर्देशों का असर स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी आयोजनों में स्पष्ट रूप से दिख सकता है।
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