मुंबई, 4 फरवरी 2026 — देश की व्यस्ततम हवाई अड्डों में से एक छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा Mumbai Airport पर सोमवार देर रात एक बड़ा विमान हादसा टल गया। टैक्सीवे पर मूवमेंट के दौरान एयर इंडिया और इंडिगो की दो उड़ानें बेहद करीब आ गईं, जिससे दोनों विमानों के विंगटिप आपस में टकरा गए। राहत की बात यह रही कि घटना के वक्त दोनों फ्लाइट्स में यात्री सवार थे, लेकिन किसी भी यात्री या क्रू मेंबर को चोट नहीं आई।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2732 कोयंबटूर के लिए पुशबैक ले रही थी, जबकि इंडिगो की फ्लाइट 6E-791 हैदराबाद से लैंड होकर टैक्सी कर रही थी। सीमित जगह और समन्वय में चूक के कारण दोनों air planes एक-दूसरे के बेहद पास आ गए। टक्कर के तुरंत बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी और ग्राउंड स्टाफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में लिया।
कैसे हुआ Mumbai Airport पर यह हादसा
हवाई अड्डों पर टेकऑफ और लैंडिंग के बाद टैक्सीवे मूवमेंट सबसे संवेदनशील चरणों में माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल, ग्राउंड हैंडलिंग टीम और पायलट्स के बीच सटीक तालमेल जरूरी होता है। सोमवार की घटना में, पुशबैक और टैक्सी के समय दोनों विमानों के रास्ते एक-दूसरे के करीब आ गए, जिससे विंगटिप कॉन्टैक्ट हुआ।
एयर इंडिया और इंडिगो—दोनों एयरलाइंस ने अलग-अलग बयान जारी कर बताया कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विमानों को तुरंत ग्राउंड कर दिया गया है। तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है और यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया। एयर इंडिया ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। इंडिगो ने कहा कि जांच पूरी होने तक विमान परिचालन से बाहर रहेंगे।
यात्रियों की सुरक्षा और आगे की जांच
घटना के बाद यात्रियों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जरूर दिखी, लेकिन एयरपोर्ट स्टाफ ने स्थिति संभाल ली। एविएशन से जुड़े जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में runway safety, taxiway operations और aviation safety protocol की भूमिका निर्णायक होती है। भारत में पिछले कुछ वर्षों में हवाई यातायात तेजी से बढ़ा है, जिससे airport safety पर लगातार निगरानी और अपग्रेड जरूरी हो गया है।
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से भी घटना की रिपोर्ट मांगे जाने की संभावना है। आम तौर पर ऐसी घटनाओं में ATC लॉग्स, पायलट कम्युनिकेशन और ग्राउंड मूवमेंट डेटा की समीक्षा की जाती है ताकि यह तय किया जा सके कि मानवीय भूल थी या प्रक्रियात्मक खामी।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हवाई अड्डों पर संचालन केवल उड़ान के समय ही नहीं, बल्कि जमीन पर भी उतना ही संवेदनशील होता है। विमान सुरक्षा, यात्री सुरक्षा और हवाई यातायात प्रबंधन जैसे पहलुओं पर सख्त अनुपालन से ही भविष्य में ऐसे जोखिमों को कम किया जा सकता है।
Mumbai Airport पर हुआ यह विंगटिप कॉन्टैक्ट गंभीर हो सकता था, लेकिन समय रहते कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि गलती कहां हुई, हालांकि फिलहाल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परिचालन को सामान्य करना प्राथमिकता बनी हुई है।
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