26 जनवरी 2026 को रूस-यूक्रेन जंग से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। करीब चार साल से जारी इस युद्ध के खत्म होने की उम्मीदें एक बार फिर मजबूत हुई हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया है कि यूक्रेन के लिए US Security Deal से जुड़ा दस्तावेज पूरी तरह तैयार है और अब केवल हस्ताक्षर की तारीख तय होना बाकी है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या युद्धविराम की दिशा में कोई ठोस कदम उठने वाला है।
US Security Deal 100% तैयार, जेलेंस्की का बड़ा दावा: अब सिर्फ साइन की तारीख बाकी
लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में मीडिया से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि यह US Security Deal पूरी तरह तैयार है और अब साझेदार देशों के साथ साइनिंग डेट फाइनल होने का इंतजार है। उन्होंने साफ किया कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर होने के बाद इसे अमेरिकी कांग्रेस और यूक्रेनी संसद में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।यह प्रस्ताव यूक्रेन की संप्रभुता और भविष्य की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता लागू होता है तो यूक्रेन को लंबे समय के लिए सुरक्षा कवच मिल सकता है और संघर्ष कम होने की संभावना बढ़ सकती है।
युद्ध खत्म होने की उम्मीद क्यों बढ़ी? और आगे क्या हो सकता है असर
करीब चार साल से चल रही इस लड़ाई में हजारों जानें जा चुकी हैं और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर भी भारी असर पड़ा है। ऐसे में किसी भी तरह की US Security Deal या गारंटी को दुनिया एक पॉजिटिव संकेत के तौर पर देख रही है।हालांकि यह भी साफ है कि सिर्फ दस्तावेज तैयार होना ही काफी नहीं है। असली चुनौती होगी—साझेदार देशों की सहमति, हस्ताक्षर की प्रक्रिया और संसदों से मंजूरी। अगर यह सब सफल रहा, तो यह कदम युद्धविराम और बातचीत की ओर बढ़ता बड़ा मोड़ बन सकता है।दूसरी तरफ, रूस की प्रतिक्रिया भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम होगी, क्योंकि किसी भी समझौते की स्थिरता तभी संभव है जब जमीनी हालात में तनाव कम हो।
कांग्रेस और संसद की मंजूरी क्यों है जरूरी? जानें प्रक्रिया
जेलेंस्की के अनुसार, दस्तावेज पर साइन होने के बाद इसे अमेरिकी कांग्रेस और यूक्रेनी संसद में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी है ताकि प्रस्ताव को कानूनी ताकत मिले और इसे लंबे समय तक लागू रखा जा सके।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे समझौते केवल बयानबाजी तक सीमित न रहें, इसके लिए पारदर्शी प्रक्रिया और मजबूत कानूनी समर्थन जरूरी होता है। इसी वजह से यूक्रेन सरकार इसे जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की कोशिश कर रही है।अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि साइनिंग डेट कब तय होती है और इसके बाद अगले कदम कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं।
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