26 जनवरी 2026 को बिहार की राजधानी पटना से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। शहर की Pink bus सेवा अब धीरे-धीरे पूरी तरह महिला ड्राइवरों के हवाले की जा रही है। पहली बार 6 युवा महिलाएं बस ड्राइवर बनने की ट्रेनिंग ले रही हैं और गणतंत्र दिवस पर गांधी मैदान में बस चलाकर अपना कौशल दिखाने की तैयारी में जुटी हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
Pink bus: पहली बार महिला ड्राइवरों को मिली कमान, महादलित बेटियां बन रहीं मिसाल
अब तक Pink bus का संचालन पुरुष ड्राइवरों द्वारा किया जाता था, लेकिन परिवहन विभाग ने पहली बार महिलाओं को प्रशिक्षण देकर यह जिम्मेदारी सौंपने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस पहले बैच में बेबी, आरती, गायत्री, सावित्री, रागिनी और अनिता शामिल हैं, जिनकी उम्र करीब 21-22 साल बताई जा रही है। खास बात यह है कि ये सभी युवतियां महादलित समुदाय से आती हैं।
यह कदम सिर्फ नौकरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने वाला संदेश भी देता है। सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की मौजूदगी से महिला यात्रियों का भरोसा बढ़ सकता है और यात्रा को ज्यादा सुरक्षित महसूस कराया जा सकता है। साथ ही यह पहल उन युवतियों के लिए उम्मीद बन सकती है, जो रोजगार के अवसर तलाश रही हैं।
ट्रेनिंग पूरी होते ही 21 हजार सैलरी, आगे 250+ महिला ड्राइवर तैयार करने का लक्ष्य
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन महिला ड्राइवरों को हर महीने करीब 21,000 रुपये वेतन मिलने की बात सामने आई है। यह एक स्थायी कमाई का जरिया बन सकता है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।परिवहन विभाग का लक्ष्य सिर्फ 6 ड्राइवरों तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में 250 से ज्यादा महिला ड्राइवर तैयार करने की योजना है और इसके लिए महिलाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह पहल रोजगार के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट का भी उदाहरण है। ऐसे कार्यक्रमों से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और पारंपरिक सोच को भी चुनौती मिलेगी कि बस ड्राइविंग सिर्फ पुरुषों का काम है।
महिलाओं के लिए सुरक्षित यात्रा की उम्मीद, Pink bus सेवा को मिलेगा नया भरोसा
Pink bus सेवा को पहले ही महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक सफर के रूप में देखा जाता है। अब जब इसकी ड्राइविंग भी महिलाओं के हाथों में होगी, तो यात्रियों के बीच भरोसा और बढ़ सकता है। patna में यह बदलाव एक नए मॉडल की तरह सामने आ रहा है, जिसे भविष्य में दूसरे शहर भी अपना सकते हैं।
आज के समय में जब महिला सुरक्षा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधाओं पर चर्चा तेज है, ऐसे में यह पहल एक सकारात्मक संकेत है। यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि एक सोच है कि महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं। आने वाले दिनों में इस कदम से शहर की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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