गिरोह की कार्यप्रणाली
साइबर ठगों ने बताया कि वे अपनी एजेंट्स के मोबाइल पर रिमोट एक्सेस रखते थे, और जब भी उनके खातों में ठगी की रकम जमा होती थी, वे उसे तुरंत अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते थे। यह प्रक्रिया खासतौर पर उन खातों से की जाती थी, जिन्हें भारत में एजेंट्स ने खोला था। विदेशों में बैठे ठग काल के जरिए लोगों से डिजिटल अरेस्ट और शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर पैसे जमा कराते थे, और फिर इन एजेंट्स के खातों से रकम ट्रांसफर करते थे।
गिरफ्तारी और आरोपियों के खुलासे
पुलिस ने गाजियाबाद, दिल्ली, बिहार और फर्रूखाबाद से गिरोह के 5 प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया। इनमें इमरान (गाजियाबाद), प्रेम साउद (दिल्ली), रवि कुमार (दिल्ली), अकबर (बिहार), और अश्वनी कुमार (फर्रूखाबाद) शामिल हैं। प्रेम साउद मूल रूप से नेपाल का रहने वाला है और उसने हरियाणा का आधार कार्ड बनवाया था, जिससे वह अपने देश और विदेशों में बिना किसी संदेह के यात्रा करता था।
ठगों का तरीका
साइबर ठगों को अपने एजेंट्स पर भरोसा नहीं था, क्योंकि उन्हें डर था कि एजेंट की नीयत बिगड़ सकती है। इसलिए उन्होंने एजेंट के मोबाइल की आईडी पर खाता खोलने के बाद, उसकी डिटेल्स टेलीग्राम के जरिए अपने पास मंगा ली थीं। इसके बाद, एपीके फाइल में लिंक भेजकर एजेंट के मोबाइल का रिमोट एक्सेस किया जाता था, और जितनी भी रकम आती थी, उसे ठग अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे।
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