किसान नाला के माध्यम से अपने खेतों तक पानी पहुंचा सकेंगे। फिलहाल बोरिंग के बंद रहने से किसान निजी पंपसेट के सहारे खेतों में लगे फसलों की सिंचाई करने को विवश हैं। आर्थिक रूप से कमजोर किसान पंपसेट से फसलों की सिंचाई करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। पर्याप्त सिंचाई के अभाव में फसलों के नुकसान होने का डर भी बना हुआ रहता है।

Samastipur News: पांच वर्ष पहले स्टेट बोरिंग के संचालन की जिम्मेवारी पंचायत को मिली थी हर जगह लघु सिंचाई विभाग के स्टेट बोरिंगों की स्थिति बदतर होने के बाद साल 2019 में इसके संचालन की जिम्मेदारी पंचायत को दी गई। बंद पड़े बोरिंगों को चालू करने के लिए विभाग की ओर से प्रति बोरिंग मेंटनेंस के लिए 60 हजार रुपए प्रदान किए गए।

ताकि बोरिंग को चालू कर किसानों को सिंचाई का लाभ दिया जा सके। हालांकि इस संबंध में मालीपुर के मुखिया प्रदीप साह ने बताया कि बोरिंग के खराब स्थिति के बारे में वे विभाग को रिपोर्ट भेजे थे। लेकिन इसके मेंटेनेंस के लिए विभाग की ओर से राशि आवंटित नहीं किया गया। मोड़तर स्थित बोरिंग के मेंटनेंस के लिए राशि आवंटित किया गया। लेकिन मालीपुर स्थित बोरिंग के लिए राशि आवंटित नहीं किया गया। मेंटेनेंस राशि नहीं दिए जाने के कारण इस बोरिंग को दुरुस्त नहीं किया जा सका। इस कारण समस्या पहले की तरह ही बनी हुई है।

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