देश के पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। प्रधानमंत्री PM Modi से जुड़े विकास कार्यक्रमों के बीच अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन APSEZ (Adani Ports and Special Economic Zone) की परियोजनाएं चर्चा में हैं। कंपनी देश के समुद्री व्यापार और माल ढुलाई नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़े निवेश कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी हर साल सैकड़ों मिलियन टन कार्गो संभालती है और आने वाले वर्षों में इस क्षमता को और बढ़ाने की योजना बना रही है।

APSEZ का बढ़ता नेटवर्क और पोर्ट क्षमता

देश के प्रमुख पोर्ट ऑपरेटरों में शामिल APSEZ का नेटवर्क भारत के समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कंपनी हर साल लगभग 633 मिलियन टन माल की हैंडलिंग करती है, जो भारत के कुल पोर्ट ट्रैफिक का करीब 28 प्रतिशत हिस्सा है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस क्षमता को बढ़ाकर 1 बिलियन टन तक पहुंचाने का है।इसी दिशा में कंपनी ने नई आधुनिक सुविधाओं का विकास शुरू किया है।

हाल ही में तैयार किया गया टर्मिनल देश की पहली पूरी तरह से ऑटोमेटेड ड्राई बल्क सुविधा के रूप में देखा जा रहा है। इस टर्मिनल का उपयोग अनाज, कोयला, खनिज और अन्य ड्राई बल्क सामान के आयात-निर्यात के लिए किया जाएगा।इस आधुनिक सुविधा की सालाना क्षमता लगभग 4 मिलियन टन बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीकी सुविधाएं देश के लॉजिस्टिक्स सेक्टर को अधिक कुशल बनाने में मदद करती हैं।

पूर्वी भारत के व्यापार और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा फायदा

नया टर्मिनल हुगली नदी के किनारे विकसित किया गया है। इसकी एक बड़ी खासियत यह है कि यहां से सीधे रेलवे कनेक्टिविटी उपलब्ध है। इससे माल की ढुलाई तेज और कम लागत में संभव हो सकेगी। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर रेल और पोर्ट कनेक्टिविटी से पूर्वी भारत के उद्योगों को भी फायदा मिलेगा।यह सुविधा खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहां से कोयला, खनिज और कृषि उत्पादों की बड़ी मात्रा में आवाजाही होती है।

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आधुनिक टर्मिनल के कारण माल की लोडिंग और अनलोडिंग की प्रक्रिया तेज हो जाएगी, जिससे समय और लागत दोनों में कमी आएगी।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में तेजी से विकसित हो रहा बंदरगाह ढांचा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से निर्यात और आयात दोनों में वृद्धि की संभावना रहती है।