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Samastipur News

‘IITian बाबा’ Abhay Singh ने रचाई शादी, धर्मशाला में शुरू की नई जिंदगी

महाकुंभ में चर्चा में आए Abhay Singh ने इंजीनियर प्रतीका से की शादी

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महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आए Abhay Singh ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने इंजीनियर प्रतीका के साथ हिमाचल प्रदेश के अघंजर महादेव मंदिर में विवाह कर लिया है। यह शादी 15 फरवरी को सादगी भरे माहौल में संपन्न हुई। शादी के बाद अब दोनों धर्मशाला में रह रहे हैं। साधु जीवन और आधुनिक शिक्षा के इस अनोखे मेल ने लोगों के बीच नई चर्चा को जन्म दिया है।

साधु जीवन से विवाह तक: एक अलग सफर की कहानी – Abhay Singh

IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले अभय सिंह का जीवन हमेशा से अलग रहा है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पारंपरिक करियर की राह छोड़कर आध्यात्मिक जीवन की ओर रुख किया। महाकुंभ के दौरान उनकी सादगी और विचारों ने लोगों का ध्यान खींचा था, जिससे उन्हें “आईआईटीयन बाबा” के नाम से पहचान मिली।अब उनका विवाह एक नया मोड़ लेकर आया है। आमतौर पर साधु जीवन और विवाह को अलग-अलग देखा जाता है, लेकिन अभय का यह फैसला सामाजिक धारणाओं को चुनौती देता नजर आता है।उनकी शादी हिमाचल के अघंजर महादेव मंदिर में बेहद सादगी से हुई। इसमें सिर्फ करीबी लोग शामिल हुए। यह दिखाता है कि उन्होंने अपने जीवन के इस अहम फैसले को भी दिखावे से दूर रखा।

समाज में चर्चा: परंपरा और आधुनिक सोच का संगम

Abhay Singh का यह कदम सोशल मीडिया और समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सोच की आजादी से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ लोग इसे परंपराओं के नजरिए से समझने की कोशिश कर रहे हैं।यह घटना इस बात को भी दर्शाती है कि आज के समय में लोग अपनी राह खुद तय करना चाहते हैं, चाहे वह आध्यात्मिक हो या व्यक्तिगत।

धर्मशाला में रहने का फैसला भी इसी दिशा में एक संकेत है। यह जगह आध्यात्मिक माहौल और शांति के लिए जानी जाती है, जहां से वे अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं।एवरग्रीन नजरिए से देखें तो यह कहानी सिर्फ एक शादी की नहीं, बल्कि बदलती सोच और समाज में व्यक्तिगत फैसलों की स्वीकार्यता की भी कहानी है।

Abhay Singh का यह कदम एक नई बहस को जन्म देता है—क्या जीवन के रास्ते तय करने के लिए तयशुदा नियम जरूरी हैं? या फिर व्यक्ति अपनी परिस्थितियों और सोच के आधार पर निर्णय ले सकता है?यह कहानी आने वाले समय में भी चर्चा में बनी रह सकती है, क्योंकि यह समाज और सोच दोनों को आईना दिखाती है।

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Srota Swati Tripathy
लेखक के बारे मेंBy Srota Swati Tripathy
जगन्नाथ की भूमि और नीले समंदर के किनारों से निकलकर झीलों के शहर भोपाल की एमसीयू यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री कर रहे हैं। सीखने और समझने का दौर अभी भी जारी है। अब 'समस्तीपुर न्यूज़' के कंटेंट राइटर और अपने लेख के लिए जाने जाते हैं|
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