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The Kerala Story 2 पर बवाल: अनुराग कश्यप ने कहा ‘प्रोपेगेंडा’, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

The Kerala Story 2 को लेकर विवाद गहराया। अनुराग कश्यप ने फिल्म को प्रोपेगेंडा बताया, वहीं केरल हाईकोर्ट ने सर्टिफिकेशन और प्रमोशनल दावों पर नोटिस जारी किया। जान
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The Kerala Story 2: फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। आगामी फिल्म The kerala story 2 को लेकर विवाद सामने आया है। निर्देशक Anurag Kashyap ने इसे “प्रोपेगेंडा” बताते हुए निर्माताओं पर तीखी टिप्पणी की है। वहीं दूसरी ओर, Kerala High Court ने फिल्म के सर्टिफिकेशन और प्रमोशनल सामग्री पर आपत्तियों के बाद नोटिस जारी किया है।करीब तीन साल पहले रिलीज हुई पहली फिल्म के बाद यह सीक्वल ‘Inspired by many true events’ टैगलाइन के साथ आ रहा है। इसी दावे को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या फिल्म में दिखाए गए तथ्य पूरी तरह प्रमाणित हैं या रचनात्मक स्वतंत्रता का हिस्सा हैं।

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The Kerala Story 2: Anurag Kashyap का बयान और इंडस्ट्री में प्रतिक्रिया

Anurag Kashyap ने हालिया बातचीत में कहा कि ऐसी फिल्में समाज को बांटने का काम करती हैं। उनके अनुसार, सिनेमा को संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदारी के साथ पेश होना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विवादित विषयों के जरिए कमाई करना सही तरीका नहीं है।हालांकि, फिल्म के समर्थकों का कहना है कि हर निर्देशक को अपनी बात रखने का अधिकार है।

वे इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तीखी बहस चल रही है। कुछ लोग फिल्म के पक्ष में हैं, तो कुछ आलोचना कर रहे हैं।भारतीय सिनेमा में पहले भी कई फिल्में सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर बनी हैं। अक्सर ऐसे विषयों पर मतभेद सामने आते हैं। यही लोकतांत्रिक विमर्श की पहचान भी है।

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सर्टिफिकेशन पर कानूनी प्रक्रिया और आगे की राह

Kerala High Court ने फिल्म की प्रमोशनल सामग्री और उसके दावों पर उठी आपत्तियों के बाद संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत यह देखेगी कि क्या प्रचार में किए गए दावे भ्रामक हैं या नहीं।भारत में फिल्मों को रिलीज से पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन से मंजूरी लेनी होती है। यदि किसी फिल्म पर तथ्यात्मक या संवेदनशीलता से जुड़े सवाल उठते हैं, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत समीक्षा हो सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद सिनेमा और समाज के रिश्ते को फिर से चर्चा में लाते हैं।

एक ओर रचनात्मक स्वतंत्रता है, तो दूसरी ओर सामाजिक जिम्मेदारी।फिलहाल, दर्शकों की नजर इस पर है कि फिल्म को अंतिम मंजूरी मिलती है या उसमें बदलाव किए जाते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।यह बहस केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कंटेंट, तथ्य और जिम्मेदारी का संतुलन कितना अहम है।

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लेखक के बारे में By Srota Swati Tripathy

जगन्नाथ की भूमि और नीले समंदर के किनारों से निकलकर झीलों के शहर भोपाल की एमसीयू यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री कर रहे हैं। सीखने और समझने का दौर अभी भी जारी है। अब 'समस्तीपुर न्यूज़' के कंटेंट राइटर और अपने लेख के लिए जाने जाते हैं|

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